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जबलपुर के डुमना नेचर पार्क में आ रहा था गंदा पानी, निगम ने लगाया एक लाख रुपये का जुर्माना

नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शहर की हरित धरोहरों और पर्यावरण संतुलन के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस कदम से अन्य ...और पढ़ें

By Sunil dahiyaEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Thu, 17 Sep 2026 08:39:49 PM (IST)Updated Date: Thu, 17 Sep 2026 08:39:49 PM (IST)
जबलपुर के डुमना नेचर पार्क में आ रहा था गंदा पानी, निगम ने लगाया एक लाख रुपये का जुर्माना
डुमना नेचर पार्क से होकर बह रहे गंदे पानी स्थल का निरीक्षण करते अधिकारी। सौजन्‍य नगर निगम

HighLights

  1. ट्रिपलआईटीडीएम के पानी के सेंपल लिए
  2. खंदारी जलाशय में भी मिल रही थी गंदगी
  3. निगम अधिकारियों ने जेसीबी से बंद कराया बहाव

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। शहर की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर और प्रमुख वन्यजीव आश्रय स्थल ‘डुमना नेचर पार्क’ में भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी, अभिकल्पन एवं विनिर्माण संस्थान (ट्रिपल आइटीडीएम) परिसर का गंदा पानी बहाया जाता था। यहीं गंदा पानी डुमना पार्क से होकर पेयजल आपूर्ति के प्रमुख स्रोत खंदारी जलाश्य में मिलता था।

शिकायत सही पाए गंदे पानी की निकासी बंद कराई

गंदे पानी शिकायत मिलने पर गुरुवार को निगमायुक्त राम प्रकाश अहिरवार के निर्देश पर नगर निगम के जल विभाग, अमृत योजना, सीवेज शाखा, स्वास्थ्य विभाग और उद्यान विभाग की संयुक्त टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर सघन निरीक्षण किया और शिकायत सही पाए गंदे पानी की निकासी बंद कराते हुए संस्था के ऊपर एक लाख रुपये का अर्थ दंड अधिरोपित किया। वहीं गंदे पानी के सेंपल भी लिए गए।


पड़ताल कर परिसर में सुधारात्मक कार्य भी कराएं

नगर निगम के अपर आयुक्त सौरभ मिश्रा, अधीक्षण यंत्री कमलेश श्रीवास्तव, स्वास्थ्य अधिकारी अभिनव मिश्रा, उद्यान अधिकारी मनीष तड़से सहित संबंधित अधिकारियों ने संस्थान के डिप्टी रजिस्ट्रार, सिक्योरिटी आफिसर, हास्टल वार्डन एवं सिविल इंजीनियर्स की मौजूदगी में दोनों परिसरों की भौगोलिक व जल निकासी व्यवस्था की गहन पड़ताल करते हुए परिसर में सुधारात्मक कार्य भी कराए।

डुमना की प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीव रहेंगे सुरक्षित

नगर निगम की इस त्वरित पहल से डुमना के भूजल स्रोतों, दुर्लभ वनस्पतियों और वन्यजीवों को प्रदूषण के संभावित खतरे से सुरक्षा मिलेगी। नगर निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शहर की हरित धरोहरों और पर्यावरण संतुलन के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस कदम से अन्य बड़े बल्क वेस्ट जनरेटर संस्थानों को भी पर्यावरण अनुकूल तकनीक अपनाने का संदेश मिला है।

अब बनेगा आधुनिक एसटीपी, लागू होगी जीरो डिस्चार्ज व्यवस्था

नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी अभिनव मिश्रा ने बताया कि ट्रिपलआइटीडीएम परिसर में सीवेज के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए आधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) भी नहीं था। लिहाजा प्रबंधन को एसटीपी लगाने के निर्देश दिए हैं।

शत-प्रतिशत सीवेज के उपचार की व्यवस्था की जाएगी

प्रबंधन ने भरोसा दिया कि परिसर में शत-प्रतिशत सीवेज के उपचार की व्यवस्था की जाएगी, ताकि गंदा पानी बाहर न निकले और जीरो लिक्विड डिस्चार्ज व्यवस्था लागू की जा सके। इसके लिए संस्थान प्रबंधन से समयबद्ध कार्ययोजना प्रस्तुत करने को कहा गया है। निगम का कहना है कि डुमना जैसे संवेदनशील वन क्षेत्र में सीवेज का बहाव रोकना जरूरी है, ताकि भूजल स्रोतों, वनस्पतियों और वन्यजीवों पर प्रदूषण का असर न पड़े।

दीवार के पास से पार्क में आ रहा था

नगर निगम के स्वास्थ्य अधिकारी अभिनव मिश्रा ने बताया कि ट्रिपल आइटीडीएम परिसर का बारिकी से निरीक्षण करने पर पाया कि संस्थान के परिसर का पानी संस्थान की टूटी दीवार से डुमना नेचर पार्क परिसर में आता था। यही पानी खंदारी जलाश्य में भी समाहित हो रहा था। खंदारी को पानी पेयजल के लिए उपयाेग होता है। लिहाजा गंदा पानी मिलने पर कार्रवाई की गई।

जेसीबी से मुरम-मलबा डालकर रोका बहाव

गंदे पानी को पार्क में जाने से रोकने के लिए निगम की टीम ने मौके पर ही जेसीबी की मदद ली। मुरम और मलबा डालकर पानी की निकासी को तत्काल बंद कराया गया। साथ ही संस्थान प्रबंधन को ड्रेनेज व्यवस्था में सुधार करने के निर्देश दिए गए।

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