
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। शहपुरा आरओबी की एप्रोच क्षतिग्रस्त होने के बाद जबलपुर-भोपाल मार्ग का यातायात वैकल्पिक रास्तों पर डायवर्ट किए जाने से पाटन रोड पर वाहनों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है।
दो लेन की इस सड़क पर अब रोजाना हजारों वाहन गुजर रहे हैं। इनमें भारी मालवाहक वाहनों की संख्या भी बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्र से जुड़ी इस सड़क पर स्थानीय लोगों, विद्यार्थियों और सामान्य यातायात की आवाजाही भी रहती है।
शहपुरा आरओबी की एप्रोच क्षतिग्रस्त होने के बाद भारी वाहनों को पाटन मार्ग से जबलपुर की ओर निकाला जा रहा है, जबकि हल्के वाहनों के लिए शहपुरा शहर के भीतर से डायवर्सन दिया गया है। इससे पाटन रोड पर सामान्य दिनों की तुलना में यातायात का दबाव कई गुना बढ़ गया है। सड़क की सीमित चौड़ाई के कारण आमने-सामने भारी वाहन आने पर उन्हें किनारे से निकालने में भी परेशानी होती है।
पाटन रोड से बड़ी संख्या में गांव और ग्रामीण बस्तियां जुड़ी हैं। यहां के लोग शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए जबलपुर और पाटन की ओर आवागमन करते हैं। भारी वाहनों की बढ़ी संख्या से स्थानीय यातायात के लिए जोखिम बढ़ गया है। कई स्थानों पर सड़क की चौड़ाई भी भारी वाहनों और सामान्य यातायात के एक साथ सुरक्षित आवागमन के लिए पर्याप्त नहीं है।
शहपुरा आरओबी की क्षतिग्रस्त एप्रोच और उससे उत्पन्न यातायात समस्या को लेकर राज्यसभा सदस्य विवेक तन्खा ने 17 सितंबर को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी को पत्र लिखा। तन्खा के अनुसार पत्र मिलने के करीब पांच मिनट बाद केंद्रीय मंत्री ने उन्हें फोन कर मामले में शीघ्र कार्रवाई का भरोसा दिया। तन्खा ने बातचीत की जानकारी अपने एक्स अकाउंट पर साझा की और केंद्रीय मंत्री की त्वरित प्रतिक्रिया की सराहना की।
तन्खा के पत्र के अनुसार जबलपुर से हिरण नदी तक 55.60 किलोमीटर लंबे मार्ग पर शहपुरा आरओबी की दायीं एप्रोच 9 सितंबर 2025 और बायीं एप्रोच 22 फरवरी 2026 को क्षतिग्रस्त हुई। जांच सीआरआरआई, नई दिल्ली से कराई गई। रिपोर्ट में मिट्टी की कम बियरिंग कैपेसिटी, गुणवत्ताहीन सामग्री और पर्याप्त ड्रेनेज नहीं होने को रिइन्फोर्स्ड अर्थ वॉल के क्षतिग्रस्त होने के कारणों में शामिल किया गया।
सीआरआरआई और मंत्रालय द्वारा नियुक्त ब्रिज डिजाइनर ने सात मीटर से अधिक ऊंची एप्रोच के लिए वायाडक्ट स्ट्रक्चर की सिफारिश की है। एमपीआरडीसी ने ठेकेदार की रिस्क एंड कॉस्ट पर पुनर्निर्माण के लिए निविदा आमंत्रित कर खोली है। इसके लिए मंत्रालय से 54.97 करोड़ रुपये की स्वीकृति अपेक्षित है।
वैकल्पिक मार्गों में सहजपुर-किसरोद-टिपराह-नोनी-घुनसौर मार्ग की स्थिति भी खराब है। करीब 6.50 किलोमीटर लंबे मार्ग में 3.18 किलोमीटर हिस्सा प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत है। ग्रामीण आवागमन के लिए बनी इस सड़क पर भारी वाहनों का दबाव बढ़ने से कई स्थानों पर सतह और किनारे क्षतिग्रस्त हो रहे हैं।
बारिश में मुरुम डालकर किए गए अस्थायी सुधार के बाद कई जगह दलदल की स्थिति बन रही है। भारी वाहन फंसने पर ग्रामीण ट्रैक्टर की मदद से उन्हें निकालते हैं, जिससे दोनों ओर वाहनों की कतार लग जाती है।
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