
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। अमर शहीद राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के 169वें बलिदान दिवस पर मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने शुक्रवार को जबलपुर के मालगोदाम चौक स्थित प्रतिमा स्थल पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। उन्होंने कहा कि पिता-पुत्र ने देश और धर्म के सम्मान के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर किया। उनका बलिदान देश की गौरवशाली विरासत का महत्वपूर्ण अध्याय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राजा शंकर शाह ने कविता और गीतों के माध्यम से अंग्रेजी शासन के खिलाफ जनजागरण किया। उनकी लेखनी ने वह काम किया, जो उस समय तलवार नहीं कर पाई। अंग्रेजों ने दोनों को बंदी बनाकर अधीनता स्वीकार करने और धर्म बदलने की शर्त रखी, लेकिन उन्होंने इसे ठुकरा दिया और बलिदान का रास्ता चुना।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार ने जनजातीय महापुरुषों राजा भभूत सिंह, राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह जैसी विभूतियों के जीवन के प्रेरक प्रसंगों को पाठ्यक्रम में स्थान दिया है। प्रदेश की भावी पीढ़ियां उनके बलिदान और जीवन के प्रेरणादायी कार्यों से परिचित होंगी।
लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि पिता-पुत्र ने अंग्रेजों से माफी मांगने के बजाय देश के लिए बलिदान चुना। जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने बताया कि जनजातीय छात्रावासों के नाम महानायकों पर रखे गए हैं। उन्होंने कहा कि पांच अक्टूबर को रानी दुर्गावती की जयंती पर उनके 52 गढ़ों के वंशजों को सम्मानित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने संग्रहालय में भी शहीदों को नमन किया और ‘नमो-प्रेरणा’ अभियान शुरू किया। बाद में रक्तदान शिविर में पहुंचकर रक्तदाताओं का उत्साह बढ़ाया। मुख्य आयोजन स्थल से ही मुख्यमंत्री ने पश्चिम विधानसभा के रामपुर छापर में बने नए अस्पताल का उद्धाटन किया।
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