
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। डीजे, लाउडस्पीकर और तेज आवाज में बजने वाले ध्वनि उपकरणों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अपने विभिन्न फैसलों में स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति या संस्था की स्वतंत्रता वहां तक ही है, जहां से दूसरे व्यक्ति के स्वास्थ्य, शांति और जीवन के अधिकार का उल्लंघन न हो।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मतलब यह नहीं है कि कोई व्यक्ति लाउडस्पीकर या एम्पलीफायर के माध्यम से अपनी आवाज उन लोगों तक भी पहुंचाए, जो उसे सुनना नहीं चाहते।
फैसले में शांति से रहने और अनचाहा शोर न सुनने के अधिकार को भी महत्वपूर्ण माना गया है। यह अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 में जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के व्यापक संरक्षण से जुड़ा है।
किसी धार्मिक, सांस्कृतिक या व्यावसायिक आयोजन के नाम पर ध्वनि प्रदूषण के नियमों की अनदेखी नहीं की जा सकती। डीजे या लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के लिए स्थानीय प्रशासन की अनुमति, जहां आवश्यक हो, प्राप्त करना और निर्धारित ध्वनि सीमा का पालन करना जरूरी है।
सामान्य नियम के मुताबिक रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच लाउडस्पीकर और सार्वजनिक ध्वनि-वर्धक उपकरणों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध है। इसका उद्देश्य रात के समय लोगों को पर्याप्त शांति और आराम उपलब्ध कराना है।
राज्य सरकारें वर्ष में अधिकतम 15 दिनों पर किसी धार्मिक या सांस्कृतिक अवसर के लिए रात 10 बजे से 12 बजे तक ध्वनि संबंधी समय-सीमा में छूट दे सकती हैं। हालांकि, ऐसी छूट भी निर्धारित ध्वनि सीमा के अधीन रहती है।
अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान, न्यायालय और अन्य निर्धारित साइलेंस जोन के आसपास ध्वनि नियंत्रण के नियम और अधिक सख्त होते हैं। यहां सामान्य छूट का लाभ नहीं लिया जा सकता। इसलिए आयोजनकर्ताओं को कार्यक्रम स्थल के आसपास लागू क्षेत्र और स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित शर्तों की जानकारी पहले से लेनी चाहिए।
डीजे या साउंड सिस्टम संचालक को कार्यक्रम से पहले आवश्यक अनुमति या लाइसेंस लेना चाहिए और उपकरण को निर्धारित डेसिबल सीमा के भीतर ही चलाना चाहिए। केवल आयोजन की अनुमति मिल जाना ध्वनि सीमा या निर्धारित समय के नियमों से छूट नहीं देता।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का मूल सिद्धांत यह है कि मनोरंजन, धार्मिक आयोजन या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का इस्तेमाल इस तरह नहीं किया जा सकता, जिससे दूसरे लोगों के स्वास्थ्य, नींद, शांति और जीवन के अधिकार पर प्रतिकूल असर पड़े। इसलिए डीजे और लाउडस्पीकर का इस्तेमाल ‘पूर्ण प्रतिबंध’ का विषय नहीं, बल्कि कानूनी अनुमति, समय-सीमा और ध्वनि-सीमा के अधीन विनियमित गतिविधि है।
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