
नई दुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। नाबालिग किशोरी की आत्महत्या के मामले में आरोपी सरकारी स्कूल के शिक्षक ने अपनी गिरफ्तारी और करीब 10 दिन जेल में रहने की जानकारी शिक्षा विभाग से छिपाए रखी। आरोप है कि किशोरी को पंचायत बुलाकर उसके चरित्र और गतिविधियों को लेकर आपत्तिजनक बातें कही गई थीं।
उसे ‘चोर’ और ‘डायन’ कहे जाने सहित अन्य आरोप भी जांच में सामने आए हैं। घटना के बाद किशोरी ने जहर खा लिया था, जिसकी इलाज के दौरान मौत हो गई।
मामले में शिक्षक संतोष कुमार पटेल को 19 अगस्त 2026 को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। करीब दस दिन बाद जमानत मिलने पर वह बाहर आया और इसके बाद सगड़ा-छपनी स्कूल में दोबारा पहुंचकर पढ़ाने लगा। खास बात यह है कि शिक्षक ने गिरफ्तारी और जेल जाने की जानकारी शिक्षा विभाग के अधिकारियों को नहीं दी। स्कूल में उसकी गैरहाजिरी को मेडिकल लीव के जरिए दर्ज कराया गया।
मामले का खुलासा तब हुआ, जब सगड़ा-छपनी स्कूल की प्राचार्य ने शिक्षक के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी को पत्र भेजा। बताया गया कि शिक्षक ने स्कूल में आवेदन देकर पारिवारिक विवाद के चलते अपने खिलाफ झूठा प्रकरण दर्ज होने की बात कही थी।
इसी आवेदन और उपलब्ध जानकारी के आधार पर प्राचार्य ने शिक्षक की गिरफ्तारी, जेल भेजे जाने और बाद में जमानत पर रिहा होने की जानकारी शिक्षा विभाग को भेजी। प्राचार्य का पत्र 8 सितंबर को डीईओ कार्यालय में प्राप्त हुआ।
इसके बाद विभाग के स्तर पर शिक्षक की गिरफ्तारी और पूरे प्रकरण की जानकारी सामने आई। डीईओ गौतम बर्वे ने भी स्वीकार किया कि उन्हें शिक्षक के जेल जाने की जानकारी पहले नहीं थी।
पुलिस की जांच के मुताबिक, 19 अक्टूबर 2025 को संतोष पटेल सहित राममिलन पटेल, अशोक पटेल और राजेश पटेल ने किशोरी के रिश्तेदारों और परिवार के सदस्यों को बुलाकर पंचायत की थी। जांच में यह बात सामने आई कि पंचायत के दौरान किशोरी के चरित्र और उसकी गतिविधियों को लेकर सवाल उठाए गए।
बताया गया कि 15 अक्टूबर को कैमरा लगाकर तैयार किया गया एक वीडियो भी पंचायत में लोगों को दिखाया गया था। किशोरी और उसके माता-पिता की मौजूदगी में उस पर चोरी सहित अन्य आरोप लगाए जाने और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किए जाने की बात पुलिस जांच में सामने आई है। पिता से कथित रूप से तीन लाख रुपये हर्जाने की मांग करने की धमकी दिए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
घटना के बाद परिजनों ने किशोरी को कुछ समय के लिए उसके मामा के घर भेज दिया था। 10 नवंबर 2025 को किशोरी ने वहीं जहरीला पदार्थ खा लिया। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे बरगी स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। प्राथमिक उपचार के बाद उसे जबलपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
किशोरी की मौत के बाद लार्डगंज थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की थी। बाद में घटनास्थल बरगी पुलिस चौकी क्षेत्र से संबंधित पाए जाने पर जांच बरगी पुलिस को सौंप दी गई। लार्डगंज और बरगी पुलिस ने मामले की जांच की।
संतोष कुमार पटेल सगड़ा-छपनी स्कूल में 7 अप्रैल 2015 से पदस्थ बताया गया है। वह राजनीतिक विज्ञान विषय पढ़ाते हैं। गिरफ्तारी से पहले उन्होंने स्कूल में मेडिकल लीव का आवेदन दिया था। जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद उन्होंने दोबारा स्कूल में उपस्थिति दर्ज कराई।
विभागीय अधिकारियों को गिरफ्तारी की जानकारी नहीं दिए जाने से अब यह सवाल भी उठ रहा है कि किसी शासकीय कर्मचारी के आपराधिक प्रकरण में गिरफ्तार होकर जेल जाने की स्थिति में विभाग को सूचना देने की प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं।
जिला शिक्षा अधिकारी गौतम बर्वे ने बताया कि शिक्षक संतोष पटेल की गिरफ्तारी और जेल भेजे जाने की जानकारी उन्हें पहले नहीं थी। स्कूल की ओर से भेजे गए पत्र की जानकारी भी बाद में सामने आई। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जाएगी और जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।