
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। गणेश पंडालों में विद्युत सुरक्षा को लेकर बिजली कंपनी की जांच और कार्रवाई के बीच बड़ा सवाल खड़ा हुआ है।
गोरखपुर क्षेत्र के दो गणेश पंडालों में 22 सितंबर को ही जांच के दौरान कटे-फटे तार, कम ऊंचाई पर वायरिंग, एमसीबी और अर्थिंग की व्यवस्था नहीं होने जैसी गंभीर खामियां सामने आ गई थीं। इसके बावजूद तत्काल एफआईआर नहीं कराई गई।
बुधवार को एक पंडाल में करंट की चपेट में आने से किशोर की मौत के बाद बिजली कंपनी के अधिकारी सक्रिय हुए और गुरुवार को दोनों मामलों में टेंट हाउस संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई।
22 सितंबर को एसडीएम गोरखपुर अनुराग सिंह, टीआई नितिन और बिजली कंपनी की टीम ने क्षेत्र के गणेश पंडालों का निरीक्षण किया था। श्री महादेव गणेश उत्सव समिति के पंडाल में आरआरआर टेंट हाउस, गढ़ा द्वारा की गई विद्युत साज-सज्जा में कटे-फटे और अमानक तार मिले।
इसी तरह सिद्धि विनायक गणेश उत्सव समिति, शारदा चौक क्षेत्र में सचिन टेंट हाउस, गढ़ा द्वारा की गई वायरिंग में भी कटे-फटे तार मिले। विद्युत तार लोहे के पाइपों में बांधे गए थे। धातु के सपोर्ट को अर्थिंग नहीं दी गई थी और एमसीबी का उपयोग भी नहीं किया गया था।
अधीक्षण यंत्री संजय अरोरा के अनुसार गणेश उत्सव के दौरान भीड़ को देखते हुए गुरुवार को शहर में करीब 80 दल बनाकर पंडालों की जांच कराई गई। सुबह 11 से शाम छह बजे तक दिन में पंडालों की लाइट चालू कराकर स्टेज, खंभों और वायरिंग में करंट लीकेज की जांच की गई। एक टीम को करीब पांच पंडालों की जिम्मेदारी दी गई थी। जांच के दौरान करीब 10 स्थानों पर विद्युत संबंधी अनियमितताएं मिलने पर नोटिस भी दिए गए हैं।
अरोरा ने बताया कि 10 किलोवाट तक के कनेक्शन में टीसी कनेक्शन देते समय सुरक्षा मानकों का पालन करने संबंधी सेल्फ डिक्लरेशन लिया जाता है। इसमें उपभोक्ता की ओर से विद्युत सुरक्षा के सभी मापदंड पूरे किए जाने की घोषणा की जाती है।
पंडालों में अर्थिंग, तारों के ज्वाइंट और वायरिंग की खामियां सामने आ रही हैं। बिजली कंपनी का कहना है कि इंटरनल वायरिंग का काम संबंधित डेकोरेटर और समिति की जिम्मेदारी है, लेकिन आमजन की सुरक्षा को देखते हुए विभाग निगरानी कर रहा है।
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