
डिजिटल डेस्क, नईदुनिया, जबलपुर। मध्य प्रदेश कैडर के 1993 बैच के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी रमेश थेटे का प्रशासनिक करियर जितना चर्चित रहा, उतना ही उनका बाद का फिल्मी सफर भी सुर्खियों में रहा है।
वर्ष 2001-02 में जबलपुर नगर निगम आयुक्त के रूप में पदस्थ रहे थेटे ने शहर में कई उल्लेखनीय काम किए। उनके कार्यकाल में नगर निगम के 309 सफाई कर्मचारियों को स्थायी नौकरी देने का फैसला खासा चर्चित हुआ था।
थेटे ने जनभागीदारी के माध्यम से जबलपुर में एक आदर्श सड़क का निर्माण भी कराया था। वहीं, अवैध निर्माण और भू-माफियाओं के खिलाफ उनकी कार्रवाई ने उन्हें सख्त प्रशासक की पहचान दिलाई। उनके रवैये के कारण उन्हें 'दूसरा खैरनार' तक कहा गया।
संचालक, रोजगार एवं प्रशिक्षण के पद पर पदस्थ हुए। वर्ष 2002 में लोकायुक्त पुलिस ने उन्हें एक लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार करने का दावा किया था। इसके बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया। मामले में निचली अदालत ने उन्हें दोषी ठहराया, लेकिन वर्ष 2012 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। इसके बाद उन्हें सेवा में वापस लिया गया।
पदोन्नति में देरी को लेकर थेटे ने सरकार पर जातिगत भेदभाव के आरोप लगाए और भोपाल में धरना भी दिया। उन्होंने सरकार की नीतियों को दलित विरोधी बताया था। वर्ष 2017 में वे प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत्त हुए।
सेवानिवृत्ति के बाद थेटे ने लेखन और फिल्म निर्माण को अपना माध्यम बनाया। वे खुद को अंबेडकरवादी विचारक, लेखक और फिल्म निर्माता के रूप में प्रस्तुत करते हैं। उनका प्रमुख प्रोजेक्ट 'द बैटल ऑफ भीमा कोरेगांव' है, जिसका निर्देशन और निर्माण उन्होंने किया है।
फिल्म 1 जनवरी 1818 को पेशवा बाजीराव द्वितीय की सेना और ईस्ट इंडिया कंपनी के महार सैनिकों के बीच हुए भीमा कोरेगांव युद्ध की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसमें अर्जुन रामपाल, दिगंगना सूर्यवंशी और सनी लियोनी प्रमुख भूमिकाओं में हैं। थेटे ने फिल्म के गीतों में गायन और गीत लेखन भी किया है।
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