
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। छोटे-छोटे मामलों में लंबे समय से जेल में बंद ऐसे जनजातीय बंदियों को कानूनी सहायता दिलाने के लिए आयोग उनके प्रकरणों की जानकारी जुटाएगा, जिन्हें आर्थिक परेशानी या कानूनी जानकारी के अभाव में जमानत और अपील का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
मध्य प्रदेश राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य भगत सिंह नेताम ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस केंद्रीय जेल का निरीक्षण कर बंदियों से सीधे संवाद किया।
उन्होंने बंदियों से पूछा कि जमानत, अपील और कानूनी सहायता प्राप्त करने में उन्हें किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदियों से भी चर्चा कर जेल की व्यवस्थाओं, भोजन, स्वास्थ्य और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली।
आयोग सदस्य ने कहा कि अशिक्षा, कानूनी जानकारी के अभाव और आर्थिक कमजोरी के कारण किसी बंदी को अनावश्यक रूप से लंबे समय तक जेल में नहीं रहना पड़े। इस दौरान एक नक्सली बंदी से भी संवाद किया।
निरीक्षण के दौरान नेताम ने जेल की पाकशाला में बंदियों के लिए तैयार किए जा रहे भोजन की व्यवस्था देखी। महिला बंदियों से चर्चा कर उनकी समस्याएं जानीं और उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों का अवलोकन किया।
उन्होंने कहा कि आयोग अनुसूचित जनजाति वर्ग के संवैधानिक अधिकारों के संरक्षण और भेदभाव या सुविधाओं के अभाव से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप के लिए प्रतिबद्ध है।
इस अवसर पर उपायुक्त जनजातीय कार्य विभाग नरोत्तम वरकडे़, सहायक आयुक्त वंदना गुप्ता, जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
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