
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। उत्तर से दक्षिण भारत को करीब लाने वाली बहुप्रतीक्षित जबलपुर-गोंदिया रेलमार्ग के दोहरीकरण को हरी झंडी मिल गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में मंगलवार को योजना को स्वीकृति प्रदान की गई, जिस पर 5236 करोड़ रुपये खर्च होंगे। परियोजना को पांच वर्ष (2030-31 तक) में पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। जबलपुर-गोंदिया रेलमार्ग महाकोशल के सिवनी, मंडला और बालाघाट जिले से होकर गुजरता है।
वर्तमान में 239 किलोमीटर का रेल मार्ग एकल रेल पथ है, जिसके समानांतर ही दूसरी लाइन बिछाई जाएगी। इसके बनने पर मध्य प्रदेश से छत्तीसगढ़ एवं महाराष्ट्र (विदर्भ) के साथ ही उत्तर भारत (पूर्वांचल) से दक्षिण भारत के बीच यात्री एवं माल यातायात को गति मिलेगी। महाकोशल अंचल तक पर्यटन स्थलों तक पर्यटकों की आवाजाही अासान बनेगी। रेलपथ के आसपास स्थित आदिवासी अंचल में औद्योगिक विकास की संभावनाओं को भी रफ्तार मिलेगी।
जबलपुर-गोंदिया रेलमार्ग आगे चांदाफोर्ट होकर बल्लारशाह को जोड़ता है। बल्लारशाह को दक्षिण का रेल प्रवेश द्वार माना जाता है, जहां से तेलंगना, कर्नाटक, तमिलनाडु और आंधप्रदेश के प्रमुख शहरों तक रेल पहुंच आसान है। अभी उत्तर भारत से ज्यादातर ट्रेनें इटारसी-नागपुर होकर बल्लारशाह तक आवाजाही करती है।
जिसका विकल्प जबलपुर-गोंदिया-बल्लारशाह मार्ग रेलपथ दोहरीकरण के बाद बन जाएगा। गोंदिया-बल्लारशाह के बीच रेलपथ दोहरीकरण के कार्य को गत वर्ष स्वीकृति प्रदान की गई थी। अब गोंदिया-जबलपुर को स्वीकृति मिलने से बल्लाशाह से जबलपुर होकर प्रयागराज तक दोहरा रेलपथ नेटवर्क तैयार हो जाएगा।
जबलपुर-गोंदिया-बल्लारशाह रेल लाइन के दोहरीकरण से अयोध्या से रामेश्वरम रामायण रेल सर्किट का विस्तार होगा। यह परियोजना काशी से कन्याकुमारी के बीच धार्मिक पर्यटन के लिए विशेष होगी। जबलपुर के धुआंधार जलप्रताप (भेड़ाघाट), कचनार शिव मंदिर, बरगी बांध, मंडला जिले के कान्हा राष्ट्रीय उद्यान (प्रोजेक्ट टाइगर), बालाघाट के गंगुलपारा बांध, जलप्रताप, गोमजी-सोमजी मंदिर और सिवनी-छिंदवाड़ा जिले में फैले पेंच नेशनल पार्क (मोगली लैंड) और सहित मध्य प्रदेश के अन्य पर्यटन स्थलों तक रेल संपर्क में सुधार होगा।
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जबलपुर-गोंदिया रेलमार्ग ब्रिटिशकाल में तैयार किया गया था। तब यह सतपुड़ा नैरोगेज का भाग था। इसके बाद वर्ष 2003-04 में जबलपुर-गोंदिया नैरोगेज को ब्राडगेज में बदलने परियोजना पर काम शुरू हुआ। आरंभ में गोंदिया-बालाघाट के बीच ही रेलमार्ग तैयार हो सका। उसके बाद वर्ष 2016 में परियोजना में आगे काम ने गति पकड़ी।
वर्ष 2021 में जबलपुर-गोंदिया के बीच ब्राडगेज लाइन बनकर तैयार हुई। दक्षिण भारत तक जाने का सीधा रास्ता होने से रेल लाइन बनते ही इसमें मालगाड़ियों का दबाव बढ़ने लगा। वर्तमान में एकल रेल मार्ग पर जबलपुर से गोंदिया के बीच कुछ पैसेंजर ट्रेन और लंबी दूरी की कुछ गिनी-चुनी एक्सप्रेस ट्रेनें संचालित होती है।