
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। माध्यमिक शिक्षा मंडल की अंकसूची में संशोधन कराने वाले विद्यार्थियों को अब भोपाल स्थित मुख्यालय के चक्कर और लंबी प्रतीक्षा से राहत मिलने वाली है।
नई व्यवस्था एक नवंबर 2026 से लागू होगी। इससे प्रदेशभर के विद्यार्थियों को संशोधन के बाद मार्कशीट प्राप्त करने में लगने वाले समय में कमी आने की उम्मीद है।
अब तक अंकसूची में नाम, जन्मतिथि, विषय या अन्य विवरणों में सुधार के लिए आवेदन करने के बाद संबंधित प्रकरणों का परीक्षण प्रदेश के जिलों में निर्धारित समन्वयक संस्थाओं द्वारा किया जाता था।
जांच के बाद संशोधन को मंजूरी देकर प्रकरण माध्यमिक शिक्षा मंडल मुख्यालय की एचओ लॉगिन पर भेजा जाता था। इसके बाद भोपाल स्थित अभिलेख कक्ष में केंद्रीकृत व्यवस्था के तहत संशोधित अंकसूची प्रिंट की जाती थी और फिर उसे आवेदक के पते पर भेजा जाता था। प्रदेशभर से आने वाले प्रकरणों के कारण इस प्रक्रिया में काफी समय लग जाता था।
विद्यार्थियों की परेशानी को देखते हुए मंडल ने संशोधित अंकसूचियों की छपाई का कार्य संभागीय कार्यालयों को सौंपने का फैसला किया है। इससे आवेदन के परीक्षण और अनुमोदन की मौजूदा प्रक्रिया जारी रहेगी, लेकिन संशोधित मार्कशीट प्रिंट कराने के लिए अब भोपाल मुख्यालय पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। हालांकि डुप्लीकेट अंकसूची, प्रमाण-पत्र और संशोधित अंकसूची प्राप्त करने के लिए पहले से निर्धारित आवेदन प्रक्रिया एवं अन्य निर्देश यथावत रहेंगे।
विद्यार्थियों के लिए अंकसूची में मामूली त्रुटि भी कई बार बड़ी परेशानी बन जाती है। नाम की स्पेलिंग या जन्मतिथि में गलती होने पर उसे ठीक कराने के लिए लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
कई विद्यार्थियों का कहना है कि संशोधित अंकसूची समय पर नहीं मिलने के कारण उन्हें नौकरी ज्वाइन करने, दस्तावेज सत्यापन कराने और आगे की प्रवेश प्रक्रिया में दिक्कतों का सामना करना पड़ा है।
कुछ मामलों में आवश्यक दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं होने से रोजगार के अवसर भी प्रभावित हुए। ऐसे में मंडल की नई व्यवस्था से विद्यार्थियों को राहत मिलने के साथ ही दस्तावेजों के निराकरण और वितरण की प्रक्रिया भी पहले से अधिक सुगम होने की उम्मीद है।