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जबलपुर में ट्रैफिक बना बीमारी, चार चौराहों पर नए सिग्नल लगाने की तैयारी

सड़क किनारे अतिक्रमण हटाने, ठेले-टपरों को निर्धारित स्थान पर व्यवस्थित करने, अवैध पार्किंग पर कार्रवाई करने और लाल बत्ती तोड़ने वालों की निगरानी बढ़ान...और पढ़ें

By Pankaj TiwariEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Wed, 14 Oct 2026 08:44:15 AM (IST)Updated Date: Wed, 14 Oct 2026 08:52:51 AM (IST)
जबलपुर में ट्रैफिक बना बीमारी, चार चौराहों पर नए सिग्नल लगाने की तैयारी
पंडित दीनदयाल चौक पर ट्रैफिक सिग्नल नहीं होने से हादसे होते हैं।

पंकज तिवारी, नईदुनिया जबलपुर। जबलपुर शहर में यातायात नियंत्रित करने के लिए 23 प्रमुख स्थानों पर ट्रैफिक सिग्नल लगे हैं, इसके बावजूद लगभग हर प्रमुख चौराहे पर जाम की स्थिति बन रही है। कहीं सड़क किनारे अतिक्रमण और ठेले-टपरे यातायात की राह रोक रहे हैं, तो कहीं बेतरतीब पार्किंग के कारण वाहनों की आवाजाही प्रभावित हो रही है। सिग्नल होने के बावजूद कई वाहन चालक लाल बत्ती की अनदेखी कर निकल जाते हैं।

इससे यातायात व्यवस्था बिगड़ने के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है। नियम तोड़ने वालों के चालान भी किए जा रहे हैं, लेकिन सड़क पर व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बरकरार है। यातायात पुलिस के दस्तावेज के अनुसार, नगर निगम ने रानीताल चौक, रामपुर चौक, एकता चौक और बलदेवबाग चौक पर नए ट्रैफिक सिग्नल लगाने का प्रस्ताव दिया है।


दूसरी ओर, दमोहनाका और दीनदयाल चौक पर रोटरी होने के कारण सिग्नल लगाने में बाधा है। इन स्थानों पर यातायात सुचारु रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जरूरत है। हालांकि, नए सिग्नल लगाने के प्रस्तावों पर अब तक की कार्रवाई और स्थापना की समयसीमा नहीं है।

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सिर्फ सिग्नल लगाने से नहीं सुधरेगी व्यवस्था

चौराहों पर यातायात सुधारने के लिए नए सिग्नल लगाने के साथ मौजूदा व्यवस्थाओं को भी प्रभावी बनाना जरूरी है। सड़क किनारे अतिक्रमण हटाने, ठेले-टपरों को निर्धारित स्थान पर व्यवस्थित करने, अवैध पार्किंग पर कार्रवाई करने और लाल बत्ती तोड़ने वालों की निगरानी बढ़ाने की जरूरत है। चौराहों की बनावट, डिवाइडर, सड़क संकेतक और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित रास्तों की समीक्षा भी जरूरी है।

लाल बत्ती तोड़कर निकलते वाहन, बढ़ रहे चालान

ट्रैफिक सिग्नल लगे होने का उद्देश्य वाहनों की आवाजाही को निर्धारित क्रम में संचालित करना है, लेकिन नियमों की अनदेखी इस व्यवस्था को कमजोर कर रही है। वाहन चालक लाल बत्ती होने के बावजूद चौराहे से निकलने का प्रयास करते हैं। इससे दूसरे मार्ग से आने वाले वाहनों के साथ टकराव का खतरा बढ़ जाता है।

दमोहनाका और दीनदयाल चौक पर बड़ी चुनौती

शहर के दमोहनाका और दीनदयाल चौक पर रोटरी होने के कारण ट्रैफिक सिग्नल स्थापित करने में दिक्कत है। ऐसे में इन चौराहों पर सड़क की बनावट, यातायात संकेतक, लेन अनुशासन और पुलिस की निगरानी के जरिए यातायात नियंत्रित करने की जरूरत है। नए चौराहों में सिग्नल लगाने के लिए यातायात विभाग ने प्रस्ताव बनाया है लेकिन यह कब तक लगेंगे यह साफ नहीं है।

इन चार चौराहों पर नए सिग्नल प्रस्तावित

  • रानीताल चौक : यातायात को नियंत्रित करने के लिए सिग्नल लगाने का प्रस्ताव।
  • रामपुर चौक : वाहनों की आवाजाही व्यवस्थित करने के लिए नई व्यवस्था की जरूरत।
  • एकता चौक : यातायात प्रबंधन के लिए सिग्नल लगाने की योजना प्रस्तावित।
  • बलदेवबाग चौक : चौराहे पर यातायात नियंत्रण के लिए नए सिग्नल का प्रस्ताव।

सिग्नल लगे, लेकिन सड़क पर व्यवस्था नदारद

जबलपुर शहर के गोहलपुर चौराहा, ब्लूम चौक, नागरथ चौक, रद्दी चौकी, घमापुर चौक, तीनपत्ती चौक, लेबर चौक, मढ़ाताल तिराहा, नौदरा ब्रिज, उखरी तिराहा, पेंटीनाका, आधारताल तिराहा, अहिंसा चौक, दर्शन तिराहा, सगड़ा तिराहा और जबलपुर अस्पताल तिराहा सहित 23 प्रमुख स्थानों पर ट्रैफिक सिग्नल लगे हैं। इसके बावजूद कई चौराहों पर यातायात का दबाव बढ़ने पर जाम की स्थिति बन जाती है।

इसकी एक बड़ी वजह सड़क किनारे होने वाले अतिक्रमण और अवैध कब्जे हैं। चौराहों के आसपास ठेले-टपरे लगने और वाहनों की बेतरतीब पार्किंग से सड़क की उपलब्ध चौड़ाई कम हो जाती है। ऐसे में सिग्नल हरा होने के बाद भी वाहन आसानी से आगे नहीं बढ़ पाते। कुछ स्थानों पर सड़क की बनावट और वाहनों के अनियंत्रित आवागमन से भी परेशानी बढ़ती है।

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