
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। शहर में अति उच्चदाब बिजली लाइनों के नीचे और आसपास हो रहे निर्माणों का मामला हाई कोर्ट पहुंचने के बाद मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एमपी ट्रांसको) सक्रिय हुई है।
कंपनी ने ट्रांसमिशन लाइनों के निर्धारित सुरक्षा क्षेत्र में बने निर्माणों को दोबारा चिह्नित करने की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की है। ऐसे 223 निर्माण पहले ही चिह्नित कर संबंधित लोगों को नोटिस दिए जा चुके हैं, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। जिला प्रशासन को भी इन्हें हटाने के लिए कई बार पत्र लिखे गए हैं।
एमपी ट्रांसको ने पहले विशेष अभियान चलाकर 132 केवी और 220 केवी ट्रांसमिशन लाइनों के आसपास बने मकानों और अन्य संरचनाओं की पहचान की थी। इनमें से चार अत्यधिक जोखिम वाले निर्माण हटाए जाने की जानकारी सामने आई थी।
अभियान धीमा पड़ गया और कई मामलों में नोटिस के बावजूद निर्माण नहीं हटाए गए। कंपनी ने जिला प्रशासन से कार्रवाई में सहयोग भी मांगा था। अब जोखिम वाले क्षेत्रों का दोबारा चिह्नांकन कर लंबित मामलों में कार्रवाई की तैयारी है।
ट्रांसमिशन लाइनों के आसपास निर्माण और कालोनियों के विकास का मामला हाई कोर्ट में विचाराधीन है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ ने ग्रीष्म जैन एवं अमित पटेल की याचिका पर राज्य शासन सहित संबंधित विभागों के 10 अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को होगी।
सुरक्षा मानकों का पालन नहीं होने से लोगों की जान को खतरा हो सकता है। तेज हवा में तारों के झूलने और भवनों के नजदीक होने से दुर्घटना की आशंका रहती है। इससे बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है। अब देखना होगा कि दोबारा चिह्नांकन के बाद लंबित मामलों में कितनी तेजी से कार्रवाई होती है।
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