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बिना ठोस आधार हाई कोर्ट पहुंचे खंडवा-मंदसौर के दो डाॅक्टर, 20 हजार रुपये जुर्माना

कोर्ट ने कहा कि छात्रों के सामने केवल मंदसौर जाकर गाइड से मार्गदर्शन लेने की व्यावहारिक कठिनाई थी। इसे गाइड की अनुपलब्धता बताकर याचिका दायर करना उचित ...और पढ़ें

By Surendra DubeyEdited By: Dheeraj kumar Bajpai
Publish Date: Mon, 05 Oct 2026 04:23:18 PM (IST)Updated Date: Mon, 05 Oct 2026 04:23:18 PM (IST)
बिना ठोस आधार हाई कोर्ट पहुंचे खंडवा-मंदसौर के दो डाॅक्टर, 20 हजार रुपये जुर्माना

HighLights

  1. एक माह में मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर में जमा करें
  2. थीसिस गाइड बदलने और समय बढ़ाने की मांग वाली याचिका निरस्त
  3. दोनों छात्रों का थीसिस मार्गदर्शन जारी रखने की अनुमति मिली हुई थी

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। हाई कोर्ट ने पीजी मेडिकल छात्रों की याचिका को गलतफहमी पर आधारित मानते हुए निरस्त कर दिया। न्यायमूर्ति विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने खंडवा मेडिकल कालेज के दो डाॅक्टरों पर कुल 20 हजार रुपये की लागत लगाई।

10-10 हजार रुपये चार सप्ताह में जबलपुर में जमा करने होंगे

दोनों को 10-10 हजार रुपये चार सप्ताह में मध्य प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर में जमा करने होंगे। याचिकाकर्ताओं ने थीसिस गाइड डाॅ. सौरभ जैन के खंडवा से मंदसौर स्थानांतरण का हवाला देते हुए नया गाइड नियुक्त करने और थीसिस जमा करने की अंतिम तारीख बढ़ाने की मांग की थी।


गाइड के स्थानांतरण से शोध कार्य हो रहा प्रभावित

डाॅ. सौरभ जैन का कहना था कि गाइड के स्थानांतरण से शोध कार्य प्रभावित हो रहा है। सुनवाई के दौरान रिकार्ड से सामने आया कि डाॅ. जैन को स्थानांतरण के बाद भी दोनों छात्रों का थीसिस मार्गदर्शन जारी रखने की अनुमति मिली हुई थी।

डाॅ. जैन को ही मार्गदर्शन जारी रखने की अनुमति दी थी

हाई कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे साबित हो कि डाॅ. जैन ने मार्गदर्शन करने से इनकार किया हो। कोर्ट ने पाया कि खंडवा मेडिकल काॅलेज में संबंधित विषय में अन्य प्रोफेसर उपलब्ध नहीं था, इसलिए डाॅ. जैन को ही मार्गदर्शन जारी रखने की अनुमति दी गई थी।

जमानती वारंट तक जारी करने की स्थिति बनी

कोर्ट ने यह भी उल्लेख किया कि याचिका के कारण मेडिकल विश्वविद्यालय के कुलपति और रजिस्ट्रार की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए जमानती वारंट तक जारी करने की स्थिति बनी।

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