
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। सिकल सेल बीमारी से पीड़ित दो बच्चों का सफलतापूर्वक हेमेटोपोएटिक स्टेम सेल ट्रांसप्लांट (एचएससीटी) करने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। बोन मैरो ट्रांसप्लांट के बाद स्वस्थ होकर घर लौटने वाले सिकल सेल पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है।
बीएमटी यूनिट प्रभारी डा श्वेता पाठक ने बताया कि कटनी निवासी 13 वर्षीय बालक का बोन मैरो ट्रांसप्लांट उसके बड़े भाई ने डोनर बनकर कराया। ट्रांसप्लांट के बाद बालक को ग्रेड-3 गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ग्राफ्ट वर्सेस होस्ट डिजीज (जीवीएचडी) जैसी गंभीर जटिलता का सामना करना पड़ा।
चिकित्सकों की सतत निगरानी और उपचार से उसने इस पर विजय प्राप्त की। लगभग तीन महीने तक अस्पताल में उपचार और देखभाल के बाद उसे छुट्टी दे दी गई। अब बालक अपने परिवार के साथ घर पर दीपावली का पर्व मनाएगा।
सीधी निवासी 10 वर्षीय बालिका बचपन से ही नियमित रूप से रक्त चढ़ाने पर निर्भर थी। उसका बोन मैरो ट्रांसप्लांट उसके जुड़वां भाई के स्टेम सेल से किया गया। ट्रांसप्लांट के बाद बालिका की स्थिति सामान्य रही और प्रक्रिया के 24वें दिन उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
इस उपलब्धि पर मेडिकल कालेज के डीन डा. नवनीत सक्सेना, अधीक्षक डा. अरविंद शर्मा, अधीक्षक एससीआइ डा. राजेश जैन और पीडियाट्रिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. पवन घनघोरिया के निरंतर सहयोग एवं मार्गदर्शन के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
बोन मैरो ट्रांसप्लांट के माध्यम से अब तक 10 सिकल सेल पीड़ित बच्चों को नया जीवन मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिली है। यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा जगत के लिए गौरव का विषय है, बल्कि उन परिवारों के लिए भी उम्मीद की किरण है, जो वर्षों से इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं।
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