
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। प्रदेश के सबसे पुराने व महाकोशल के प्रमुख नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल काॅलेज में अब यूनिकान्डिलर नी रिप्लेसमेंट सर्जरी संभव है।
आमतौर पर इस सर्जरी में 40 से 45 मिनट लगते हैं लेकिन चूंकि इस सर्जरी को लेकर हमें संबंधित चिकित्सकों को समझाना भी था तो करीब एक घंटा लगा। यह यूनिकान्डिलर नी रिप्लेसमेंट सर्जरी एक 56 साल के एक मरीज की हुई और लाइव 60 से 70 चिकित्सकों से जानकारी साझा की गई।
यह बात शनिवार को लाइव वर्कशाप का संचालन कर रहे मध्य भारत के प्रसिद्ध ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डाॅ. हेमंत मंडोवरा ने प्रेसवार्ता में कही।
आर्थोपेडिक सर्जरी के क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों और घुटना प्रत्यारोपण की नवीनतम विधियों पर केंद्रित एक दिवसीय यूनिकान्डिलर नी रिप्लेसमेंट वर्कशाप का आयोजन शनिवार को एक निजी होटल में हुई।
लाइव सर्जरी के बाद प्रेसवार्ता में मेडिकल काॅलेज आर्थोपेडिक्स विभागाध्यक्ष डाॅ. केके पांडे, एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. दिगंबर पीपरा की मौजूदगी में डाॅ. हेमंत मंडोवरा ने बताया कि यह नई तकनीक है और निजी में यह सर्जरी ढाई से तीन लाख में होती है, जबकि सरकारी अस्पताल में निश्शुल्क है।
यूनिकॉन्डिलर नी रिप्लेसमेंट उन चुनिदा मरीजों के लिए महत्वपूर्ण विकल्प है, जिनके घुटने का डैमेज किसी एक हिस्से तक सीमित रहता है। ऐसे मामलों में मरीज का सही चयन और सटीक सर्जिकल प्लानिंग उपचार के परिणाम के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है।
इस वर्कशाप में लाइव सर्जरी और हैंड्स-ऑन ट्रेनिंग के माध्यम से सर्जन्स को इस तकनीक की व्यावहारिक बारीकियों को समझने का अवसर मिला।
डा केके पांडे ने कहा इस तरह की शैक्षणिक वर्कशाप के माध्यम से चिकित्सकों को नई तकनीक की जानकारी के साथ उन्हें व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर मिले, ताकि इसका लाभ भविष्य में मरीजों को बेहतर उपचार के रूप में मिल सके।
आर्थोपेडिक सर्जन एवं वर्कशाप के आयोजन सचिव डाॅ. उत्सव कटकवार ने कहा सर्जरी में लगातार नई तकनीकें और उपचार के बेहतर विकल्प सामने आ रहे हैं। ऐसे में विशेषज्ञों के बीच अनुभव और ज्ञान का आदान-प्रदान मरीजों के उपचार को और बेहतर बनाने में मदद करता है।
वर्कशाप की खासियत लाइव सर्जरी और सा बोन हैड्स-आन ट्रेनिंग रही। लाइव सर्जरी के माध्यम से प्रतिभागी यूनिकान्डिलर नी रिप्लेसमेंट की पूरी प्रक्रिया को प्रत्यक्ष रूप से देख सके। वहीं सा बोन माडल पर हुए प्रशिक्षण में चिकित्सकों को सर्जिकल तकनीक, बोन कटिंग और इम्प्लांट प्लेसमेंट से जुड़ी बारीकियों को व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर मिला।
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