
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। दीपावली पर अपने घर पहुंचने और स्वजनों के साथ त्योहार मनाने की चाहत रखने वाले यात्रियों के लिए बस का सफर भी महंगा पड़ रहा है। ऐसे में निजी बसों के ऑनलाइन किरायों में भारी अंतर बना हुआ है।
जबलपुर से नागपुर के लिए अलग-अलग बस ऑपरेटरों के किराये में 14 गुना तक का अंतर दर्ज किया गया है। पुणे, हैदराबाद और इंदौर के मार्गों पर भी किरायों में कई गुना अंतर दिखाई दे रहा है।
30 अक्टूबर के लिए जबलपुर से विभिन्न शहरों के एसी स्लीपर बस किरायों की उपलब्ध सूची में कहीं 535 रुपये में टिकट मिल रहा है, तो कहीं इसी शहर के लिए किराया हजारों रुपये तक पहुंच गया है।
ऑनलाइन बुकिंग के लिए उपलब्ध कराई गई किराया सूची के अनुसार, जबलपुर से नागपुर के लिए नंदन ट्रेवल्स का एसी स्लीपर किराया 535 रुपये है, जबकि आदर्श एक्सप्रेस का किराया 7500 रुपये बताया गया है। दोनों के बीच 6965 रुपये का अंतर है।
जबलपुर से नागपुर: नंदन ट्रेवल्स का एसी स्लीपर किराया 535 रुपये, कनकेर रोडवेज प्राइवेट लिमिटेड का 1080 रुपये, भैया ट्रेवल्स का 3000 रुपये, जीके ट्रेवल्स का एसी बस किराया 3599 रुपये, आजाद बस का 5000 रुपये, संजय ट्रेवल्स का 5900 रुपये, घोसी ब्रदर्स ट्रेवल्स का 6000 रुपये, सिमरन एक्सप्रेस का 6000 रुपये, डॉल्फिन ट्रेवल हाउस का 7000 रुपये और आदर्श एक्सप्रेस का 7500 रुपये बताया गया है। इस मार्ग पर सबसे कम और सबसे अधिक किराये में 6965 रुपये का अंतर है।
मध्य प्रदेश सरकार ने अगस्त 2026 में यात्री बसों के किराये की दरों में संशोधन किया था। प्रकाशित दरों के अनुसार सामान्य स्टेज कैरिज बसों के लिए अधिकतम आधार किराया दो रुपये प्रति यात्री प्रति किलोमीटर और न्यूनतम किराया 10 रुपये निर्धारित किया गया है।
अलग-अलग श्रेणियों के लिए सामान्य किराये से अधिकतम 10 प्रतिशत रात्रि सेवा, 25 प्रतिशत डीलक्स नान-एसी, 40 प्रतिशत स्लीपर, 50 प्रतिशत डीलक्स एसी और 75 प्रतिशत सुपर लग्जरी एसी कोच की दर निर्धारित की गई है। अधिसूचना में कुछ बस श्रेणियों पर अलग से रात्रि शुल्क और एक्सप्रेस सेवा का अतिरिक्त शुल्क लेने की अनुमति नहीं है।
इन दरों के आधार पर किसी बस ऑपरेटर द्वारा वसूले जा रहे किराये को सीधे अवैध घोषित करने से पहले बस के परमिट, सेवा की श्रेणी, यात्रा की दूरी और संबंधित नियमों की जांच जरूरी है। परिवहन विभाग को यह स्पष्ट करना होगा कि सूचीबद्ध बसों पर अधिकतम किराये के नियम किस सीमा तक लागू होते हैं और ऑनलाइन बुकिंग में प्रदर्शित किराये की जांच किस तरह की जाती है।
आनलाइन टिकट बुकिंग के दौरान यात्रियों को सीट चुनने का विकल्प दिया जाता है। यात्रियों की शिकायत है कि सिंगल साइड या सामने की सीट चुनने पर अतिरिक्त राशि चुकानी पड़ सकती है। इससे टिकट का कुल खर्च और बढ़ जाता है। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि सीट चयन के लिए लिया जाने वाला अतिरिक्त शुल्क किस आधार पर निर्धारित है, इसकी जानकारी बुकिंग के समय यात्री को दी जा रही है या नहीं और संबंधित नियम इसकी अनुमति देते हैं या नहीं।
त्योहारों के दौरान यात्रियों की संख्या और टिकटों की मांग बढ़ना स्वाभाविक है, लेकिन अलग-अलग ऑपरेटरों के किरायों में इतना बड़ा अंतर यात्रियों के लिए चिंता का विषय है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर किराये की पारदर्शिता, बस की श्रेणी और परमिट की जानकारी तथा अतिरिक्त शुल्क का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।
परिवहन विभाग को 30 अक्टूबर की बुकिंग दरों की जांच कर यह देखना चाहिए कि निर्धारित नियमों के अनुरूप ही किराया लिया जा रहा है या नहीं। यात्रियों को भी टिकट बुक करते समय बस की श्रेणी, कुल देय राशि और सीट चयन के अतिरिक्त शुल्क की जानकारी देखनी चाहिए।
आल इंडिया परमिट वाली बसों का किराया शासन स्तर पर निर्धारित नहीं होता है। शासन की ओर से स्टेज कैरिज बसों के किराये तय किए जाते हैं। आल इंडिया परमिट वाली बसों का संचालन करने वाले आपरेटर आनलाइन एप के माध्यम से बुकिंग करते हैं। इन बसों में मनमाना किराया वसूले जाने के मामले को लेकर शासन स्तर पर चर्चा की जा रही है। ऐसे बस आपरेटरों पर नियंत्रण के लिए शासन स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। कई बस आपरेटर डायनेमिक प्राइसिंग करते हैं।
रिंकु शर्मा, आरटीओ।