
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। बारिश के बाद शहर में बुखार का ट्रिपल अटैक चिंता बढ़ा रहा है। डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के नए मामले सामने आने के साथ वायरल बुखार के मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। मेडिकल कालेज अस्पताल से लेकर जिला अस्पताल और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक ओपीडी में मरीजों की भीड़ है।
सरकारी आंकड़ों में इस वर्ष अब तक मलेरिया के सात, डेंगू के 12 और चिकनगुनिया के दो मरीज दर्ज हैं, लेकिन जमीनी तस्वीर इससे कहीं ज्यादा गंभीर नजर आ रही है। निजी अस्पतालों में भी बुखार के मरीज भर्ती हो रहे हैं। सबसे बड़ी चिंता शहर के खाली पड़े प्लाटों और खुले स्थानों में जमा बारिश का पानी है।
यही ठहरा हुआ पानी मच्छरों के पनपने की मुफीद जगह बन गया है। स्थानीय स्तर पर लोगों का कहना है कि नगर निगम की टीमें इन स्थानों पर नियमित निरीक्षण और लार्वा विनष्टीकरण नहीं कर रही हैं। यदि समय रहते जलभराव खत्म नहीं हुआ और मच्छरों के लार्वा नष्ट नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में मच्छरजनित बीमारियों का प्रकोप और बढ़ सकता है।
मेडिकल कालेज की ओपीडी में रोजाना 400 से अधिक मरीज बुखार और मौसमी संक्रमण की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मनमोहन नगर की करीब 350 मरीजों की रोजाना ओपीडी में भी लगभग 40 प्रतिशत मरीज वायरल बुखार से पीड़ित बताए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने बुखार के मरीजों की मलेरिया के साथ डेंगू और टाइफाइड की जांच भी तेज की है। अब तक विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों में 400 से अधिक बुखार पीड़ितों की जांच की जा चुकी है।
स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे टीमों को सक्रिय किया है, लेकिन बीमारी का वास्तविक फैलाव जानने के लिए केवल सरकारी केंद्रों के आंकड़े पर्याप्त नहीं हैं। शहर की बस्तियों और निजी अस्पतालों में जाकर स्थिति का जायजा लिया जाए तो बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या कहीं अधिक मिल सकती है। निजी अस्पतालों में भर्ती मरीजों और स्थानीय स्तर पर हो रही जांच को भी निगरानी में शामिल करना जरूरी है।
वर्ष मलेरिया डेंगू चिकनगुनिया
2022 27 139 126
2023 9 188 127
2024 12 432 126
2025 16 74 38
2026* 7 12 2
(*इस वर्ष अब तक)
पिछले एक सप्ताह में वायरल से पीड़ितों की संख्या में इजाफा हुआ है। करीब 300 से 350 की ओपीडी में आधे बुखार, सर्दी-खांसी से परेशान मरीज शामिल है। फीवर वाले केस में हम यह जांच कर सुनिश्चित होने का प्रयास कर रहे हैं कि कहीं इनमें टाइफाइड-डेंगू के लक्षण तो नहीं।
डाॅ. अंशुल शर्मा, प्रभारी मनमोहन नगर स्वास्थ्य केंद्र
मच्छरजनित रोगों से बचाव के लिए जिला अस्पताल सहित सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर्याप्त व्यवस्था की गई है, जांच का क्रम भी सतत जारी है। इसलिए लिए लोगों को मलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया व मलेरिया को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। निजी अस्पतालों से भी हर दिन रिपोर्ट अपडेट हो रही है।
डाॅ. नवीन कोठारी, सीएमएचओ
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