
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। संस्कारधानी का शारदीय नवरात्र केवल तिथियों का पर्व नहीं, आस्था, शक्ति और साधना का ऐसा उत्सव है, जिसमें शहर का कण-कण देवीमय हो उठता है। इस बार मां भगवती का आगमन हाथी पर होगा, जिसे शुभता, समृद्धि और अच्छी वर्षा का प्रतीक माना गया है। खास बात यह है कि 50 वर्षों में छठी बार नवरात्र का ऐसा संयोग बना है, जिसमें तिथि क्षय नहीं होने से आराधना का पर्व पूरे दस दिनों तक चलेगा।
आचार्य पंडित सोहन शास्त्री, परमहंसी गंगा आश्रम झोतेश्वर के अनुसार, शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से प्रारंभ होंगे। प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात 10:06 बजे से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात 8:37 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के अनुसार 11 अक्टूबर को घटस्थापना होगी।
अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:37 से दोपहर 12:23 बजे तक रहेगा। इसी मुहूर्त में घटस्थापना शास्त्र सम्मत मानी गई है। नवरात्र में पहले दिन मां शैलपुत्री से लेकर नवमी को मां सिद्धिदात्री तक देवी के नौ स्वरूपों की आराधना होगी। 18 अक्टूबर को अष्टमी रहेगी और 19 अक्टूबर की सुबह 7:53 बजे तक इसकी व्याप्ति होने से भक्तों को शक्ति साधना का विशेष अवसर मिलेगा।
20 अक्टूबर को विजयादशमी मनाई जाएगी। उस दिन नवमी सुबह 9:35 बजे तक और इसके बाद दशमी तिथि रहेगी। श्रवण नक्षत्र के अपराह्न योग में विजयादशमी का पर्व शास्त्र सम्मत होगा। पंडित सोहन शास्त्री कहते हैं कि नवरात्र में दुर्गा सप्तशती पाठ, जवारा स्थापना, व्रत, कन्या व बटुक पूजन के साथ श्रद्धापूर्वक भगवती की आराधना जीवन में शक्ति और सकारात्मकता का संचार करती है। सनातन परंपरा में वर्ष में चार नवरात्र माने गए हैं, जिनमें शारदीय नवरात्र का विशेष महत्व है।