
नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। राजनीति पर सवाल उठा तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डाॅ. मोहन भागवत ने दोटूक जवाब दिया। उन्होंने कहा ‘राजनीतिक प्रश्न राजनीतिक लोगों से पूछे जाने चाहिए, संघ का इससे वास्ता नहीं है।
श्रीराम इंजीनियरिंग काॅलेज में महाकोशल प्रांत के तीन दिवसीय युवा शिविर के समापन पर युवाओं के साथ संवाद में राजनीति से जुड़े सवालों पर उन्होंने यही रुख रखा। संवाद में जनसंख्या असंतुलन, राममंदिर, जम्मू-कश्मीर और संघ के शताब्दी वर्ष जैसे मुद्दे भी उठे।
युवाओं ने करीब 50 सवाल तैयार किए थे, लेकिन समय की सीमा के चलते 17-18 पर ही चर्चा हो सकी। मुस्लिम समुदाय के प्रति संघ के दृष्टिकोण पर डा. भागवत ने कहा कि जो भारत को अपना मानता है, उसकी उन्नति में सहभागी बनता है और देश की प्रगति से खुश होता है, संघ उसके साथ भारतीय के रूप में व्यवहार करता है।
उन्होंने धर्म और प्रांत के आधार पर भेदभाव करने के बजाय देश के प्रति व्यक्ति के भाव और व्यवहार को महत्वपूर्ण बताया। राजनीतिक सवालों से इतर संवाद का केंद्र व्यक्ति निर्माण, शाखा, अनुशासन, समय प्रबंधन और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी रहा। भागवत ने युवाओं से स्वयं के आचरण में सकारात्मक बदलाव लाने, पारिवारिक दायित्व निभाने और अपनी क्षमता के अनुसार समाज व राष्ट्र के लिए योगदान देने का आह्वान किया।
महाकोशल प्रांत में संघ के शताब्दी वर्ष में आयोजित यह अंतिम कार्यक्रम था। सोमवार को डाॅ. भागवत संघ प्रांत कार्यकारिणी और विभाग टोली की बैठक लेंगे। श्रीराम इंजीनियरिंग काॅलेज में सुबह नौ से शाम चार बजे तक बैठक तीन सत्रों में होगी।
डाॅ. भागवत ने स्वयंसेवकों को शाखा के लिए एक घंटा देने और संगठनात्मक कार्यों में अपनी क्षमता के अनुसार समय बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही भोजन, आवास, रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी पारिवारिक जरूरतों का ध्यान रखते हुए व्यक्तिगत जीवन और सामाजिक दायित्वों के बीच संतुलन बनाने पर जोर दिया।
युवा शिविर में व्यक्ति निर्माण को राष्ट्र निर्माण से जोड़ते हुए अनुशासन, मधुर वाणी, निस्वार्थ सेवा और मित्रता बढ़ाने जैसे विषयों पर चर्चा हुई। डाॅ. भागवत ने युवाओं को पहले स्वयं के विचार, व्यवहार और आचरण में सुधार लाने तथा फिर समाज में सकारात्मक परिवर्तन के लिए योगदान देने का संदेश दिया।
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