
विशाल आनंद छटिये, नईदुनिया, झाबुआ : हूं हाट जाई रयो से। तमुयी खावनु खादु के। मारू नाम प्रकाश से जैसी भीली भाषा के शब्द जल्द ही केंद्र सरकार की आदिवाणी ऐप से सुनाई देंगे।
दरअसल, मोटा (जनजातीय कार्य मंत्रालय भारत सरकार आईआईटी दिल्ली) के निर्देशन में जनजातीय अनुसंधान एवं विकास संस्था (टीआरआई) भोपाल के निर्देशों यह भीली भाषा एआई टूल्स का कार्य किया जा रहा है।
इसमें हिंदी भाषा का भीली भाषा का अनुवाद किया जा रहा है। भीली भाषा के प्रचार प्रसार और उसकी जानकारी के लिए दो साल पहले इसका डेटा संग्रहण और ऐप बनाने का निर्णय लिया था। इसके बाद आईआईटी दिल्ली की टीम ने झाबुआ पहुंचकर इसकी (स्पीच डेटा) जानकारी जुटाई जा रही है।
दिल्ली और स्थानीय टीम सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक जिले के कई क्षेत्रों में भ्रमण कर भीली भाषा संग्रहित कर रही है। दिल्ली टीम के प्रशांत कुमार, प्रेमचंद यादव, और मोहम्मद फजल है। इनके साथ ही स्थानीय टीम के जिला समन्यवक बजरंग सिंह नलवाया अनुवादक, प्रकाश अमलियार व जयसिंह ढाक कम्प्यूटर ऑपरेटर काम कर रहे हैं। प्रशांत कुमार ने बताया कि लगभग 80 प्रतिशत से ज्यादा काम हो चुका है।
आगामी एक से दो माह में काम पूरा होगा। इसेक बाद दिल्ली से मोटा इसका ऐप लांच करेगा।जिला समन्यवक बजरंग सिंह ने बताया कि हमने जिले के प्रमुख धार्मिक स्थल सहित स्कूल व कालेज व ग्रामीण क्षेत्र पहुंचकर भीली भाषा को संग्रहित किया है। इसमें कालेज के प्रोफेसर, विद्यार्थी, समासेवक, ग्रामीण आदि लोगों ने सहयोग किया है।किसी भी भाषा में बोलो तो भीली का अनुवाद हो जाएगा या भीली में बोलो तो दूसरी भाषा में अनुवाद मिलेगा।
इसके चार पार्ट है। इसमें अनुवादक टाइप करेंगे शब्द टू शब्द तो अनुवाद मिल जाएगा। इसमें दूसरा टेक्सट टू स्पीच है, जिनकों लिखते नहीं आती है। वह कर सकते हैं। सुन सकते हैं। जिनको पढ़नी नहीं आती है वह सुन सकते। तीसरा वाइस ट्रांसलेटर है। इसमें बोलकर अनुवाद कर देगा। फिलहाल अंग्रेजी व हिंदी के अनुवाद कर रहे हैं। यह माडल बने लेंगे तो अन्य देश की भाषाओं में अनुवाद हो जाएगा।
ग्रियर्सन (ग्रियर्सन) और अन्य भाषाओं के अनुयायियों के अनुसार, भीली मुख्य रूप से पश्चिमी हिंद-आर्य भाषा परिवार से जुड़ी हुई है, जिसका गुजराती, राजस्थानी, खानदेशी और मराठी भाषाओं पर गहरा प्रभाव है। भील जनजाति और उनकी भाषा-संस्कृति के संकेत रामायण और महाभारत जैसे प्राचीन महाकाव्यों से भी मिलते हैं, जैसे कि निषादराज और शबरी का प्रसंग।
भीली बोली भारत की सबसे पुरानी पुरानी बस्ती में से एक भील जनजाति बोली जाने वाली एक प्रमुख पश्चिमी हिंद-आर्य भाषा है। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के क्षेत्रों एक करोड़ लोग भीली बोलते हैं। झाबुआ से भीली भाषा की पहली फीचर फिल्म ''फैसला मजूर छे'' (फैसला मजूर छे) का निर्माण हो चुका है, जो स्थानीय स्तर पर काफी पसंद की गई।
इसके अलावा सोशल मीडिया पर भीली बोली में छपने वाले अनोखे शादी के कार्ड और पारंपरिक भीली गरबा और लोकगीत काफी वायरल हो रहे हैं।इसके अलावा दिल्ली में आयोजित ''जन जातीय साहित्य महोत्सव'' जैसे बड़े राष्ट्रीय मंचों पर झाबुआ के स्थानीय कलाकार ज्योति मंदोद भील और मंगला अग्रवाल मेड़ा ने भीली बोली में अपनी स्वरचित फिल्में, चित्र और साहित्य का वाचन कर इस बोली की सांस्कृतिक समृद्धि को देश के सामने रखा है।
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