झाबुआ के उकाला फलिया में 700 की आबादी पर स्कूल नहीं, मवेशी चराने को मजबूर बचपन
झाबुआ जिले के पेटलावद क्षेत्र के मोहनकोट पंचायत अंतर्गत उकाला फलिया में बच्चे आज भी पढ़ाई से वंचित हैं। यहां आठ साल से स्कूल को डाइस कोड नहीं मिला, जिससे नियमित विद्यालय का संचालन नहीं हो सका।
Publish Date: Tue, 27 Oct 2026 02:29:44 PM (IST)Updated Date: Tue, 27 Oct 2026 02:29:44 PM (IST)
स्कूल नहीं होने से बच्चे मवेशी चराते हैं। -नईदुनियाHighLights
- आठ साल से स्कूल का इंतजार
- डाइस कोड के अभाव में बंद हुई व्यवस्था
- उकाला फलिया में बच्चे आज भी पढ़ाई से वंचित हैं
नईदुनिया प्रतिनिधि, झाबुआ : सरकार हर बच्चे तक शिक्षा पहुंचाने के दावे करती है, लेकिन झाबुआ जिले के पेटलावद क्षेत्र के मोहनकोट पंचायत अंतर्गत उकाला फलिया में बच्चे आज भी पढ़ाई से वंचित हैं। यहां आठ साल से स्कूल को डाइस कोड (स्कूल की विशिष्ट पहचान संख्या) नहीं मिला, जिससे नियमित विद्यालय का संचालन नहीं हो सका। इससे बच्चों को पढ़ाई की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
नजदीकी स्कूल करीब चार किमी दूर है
करीब 700 की आबादी वाले फलिये के बच्चों का अधिकांश समय मवेशी चराने और छोटे भाई-बहनों की देखरेख में बीतता है। यहां एकमात्र आंगनबाड़ी भी किराए के भवन में चलती है। नजदीकी स्कूल करीब चार किमी दूर है और बच्चों के वहां तक जाने का कोई साधन नहीं है। पूरे झाबुआ जिले में 700 से 1000 की आबादी वाले ऐसे 10 स्थान हैं जहां स्कूल नहीं हैं।
डाइस कोड संबंधी समस्याओं के चलते व्यवस्था बंद हो गई
उकाला फलिया जनपद सदस्य वीरू भाभर के अनुसार, वर्ष 2017 में तत्कालीन एसडीएम हर्षल पंचोली के निर्देश पर यहां स्कूल शुरू हुआ था। दो साल बाद अतिथि शिक्षक के वेतन, भवन के किराए और डाइस कोड संबंधी समस्याओं के चलते व्यवस्था बंद हो गई। फलिये में गुलाबसिंह सिंगाड़ एकमात्र शिक्षित व्यक्ति हैं, जो अतिथि शिक्षक हैं।
अधिकारियों ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों से चर्चा की
पिछले दिनों जनपद सदस्य की सीएम हेल्पलाइन 181 पर शिकायत के बाद अधिकारियों ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों से चर्चा की। ग्रामीणों ने शिकायत वापस लेने के दबाव का आरोप लगाया और स्थायी स्कूल की मांग की है।
बीआरसी रेखा गिरी के अनुसार, स्कूल के लिए जमीन चिह्नित कर फाइल भोपाल भेजी गई है।