
नईदुनिया प्रतिनिधि, कटनी। नर्मदा के जल को दूर-दराज के खेतों तक पहुंचाने की संकल्पना को जमीन के भीतर आकार देती स्लीमनाबाद की देश की सबसे लंबी वाटर टनल झारखंड से आए इन्फ्लुएंसर्स के प्रतिनिधिमंडल के लिए आकर्षण का केंद्र बनी।
सेवा संकल्प अभियान के तहत कटनी पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने स्लीमनाबाद स्थित वाटर टनल का अवलोकन किया और इसके निर्माण में अपनाई गई अत्याधुनिक तकनीक, बेजोड़ इंजीनियरिंग तथा विशाल जल परिवहन क्षमता समझी।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने टनल की निर्माण तकनीक और इसकी संरचना को करीब से देखा। उन्होंने कहा कि जमीन की सतह से कई मीटर नीचे इतनी लंबी और विशाल जल सुरंग का निर्माण इंजीनियरिंग की असाधारण उपलब्धि है। यह परियोजना आधुनिक तकनीक के साथ जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन की दिशा में भी महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करती है।
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के कार्यपालन यंत्री सहज श्रीवास्तव ने प्रतिनिधिमंडल को स्लीमनाबाद वाटर टनल की विशेषताओं और निर्माण प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लगभग 12 किलोमीटर लंबी इस वाटर टनल का व्यास 10.14 मीटर है तथा इसमें 152 क्यूमेक पानी के डिस्चार्ज की क्षमता है।
उन्होंने बताया कि टनल का निर्माण कई स्थानों पर जमीन की सतह से लगभग 20 से 40 मीटर नीचे किया गया है। टनल के निर्माण के दौरान 10 लाख क्यूबिक मीटर से अधिक मिट्टी की खुदाई की गई।
बरगी व्यपवर्तन परियोजना केवल एक वाटर टनल का निर्माण नहीं, बल्कि मध्यप्रदेश के बड़े भू-भाग में सिंचाई के विस्तार की महत्वपूर्ण परियोजना है। इसके माध्यम से जबलपुर स्थित बरगी बांध से नर्मदा जल को सतना, मैहर, कटनी, रीवा और पन्ना जिलों तक पहुंचाया जाएगा। परियोजना से इन जिलों में कुल 1 लाख 85 हजार हेक्टेयर कमांड क्षेत्र को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा।