
नईदुनिया न्यूज, ढीमरखेड़ा। गांव में लंबे समय से बेखौफ चल रही अवैध पैकारी और उससे बिगड़ते सामाजिक माहौल से आक्रोशित सैकड़ों महिलाओं ने सड़क पर उतरकर उग्र प्रदर्शन किया और मुख्य मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। हाथों में तख्तियां लिए और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करती महिलाओं के इस कदम से सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और काफी देर तक आवागमन पूरी तरह ठप्प रहा।
ग्राम पोड़ी खिरवा में अवैध शराब की पैकारी कोई नया मामला नहीं है। स्थानीय महिलाओं के अनुसार, गांव के विभिन्न मोहल्लों में लंबे समय से अवैध रूप से शराब बेची जा रही है। जगह-जगह शराब की उपलब्धता के कारण न केवल युवा पीढ़ी नशे की गर्त में धकेली जा रही है, बल्कि गांव का शांतिपूर्ण माहौल भी पूरी तरह दूषित हो चुका है।
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने अपना दुख और गुस्सा जाहिर करते हुए बताया कि अवैध शराब की बिक्री के कारण उनके घरों की शांति छीन चुकी है। दिन ढलते ही शराबियों का जमावड़ा शुरू हो जाता है, जिससे महिलाओं और बेटियों का घर से बाहर निकलना तक दूभर हो जाता है। नशे में धुत होकर लोग राह चलती महिलाओं पर छींटाकशी करते हैं और आपस में गाली-गलौज व मारपीट की घटनाएं रोज की बात बन गई हैं।
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं का कहना था कि शराब की इस अवैध बिक्री ने सबसे ज्यादा नुकसान गरीब और मजदूर परिवारों को पहुंचाया है। मेहनत-मजदूरी करके कमाए गए पैसों का एक बड़ा हिस्सा पुरुष अवैध शराब खरीदने में उड़ा देते हैं। इसके बाद घर लौटने पर रोज-रोज घरेलू हिंसा, मारपीट और विवाद की स्थिति बनती है।
बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाने, राशन पानी का प्रबंध करने और घर चलाने की पूरी जिम्मेदारी महिलाओं पर आ जाती है। अवैध पैकारी ने कई हंसते-खेलते परिवारों को बर्बादी के कगार पर लाकर खड़ा कर दिया है। महिलाओं ने आक्रोश जताते हुए कहा कि कई बार आबकारी विभाग और स्थानीय पुलिस को इस बात की सूचना दी गई, लेकिन ठोस कार्रवाई न होने से अवैध शराब ठेकेदारों व पैकारियों के हौसले लगातार बुलंद होते गए।
शुक्रवार सुबह से ही गांव की महिलाएं एकजुट होना शुरू हो गईं। देखते ही देखते सैकड़ों की संख्या में महिलाएं पोड़ी खिरवा के मुख्य मार्ग पर एकत्र हो गईं और वहां बैठकर चक्काजाम कर दिया।महिलाओं ने अपने हाथों में बैनर और तख्तियां ले रखी थीं, जिन पर "अवैध शराब बिक्री बंद करो", "गांव का माहौल खराब करना बंद करो" और "आबकारी प्रशासन होश में आओ" जैसे नारे लिखे हुए थे।
महिलाओं के इस अचानक उठाए गए कदम से मार्ग के दोनों ओर यात्री बसों, ट्रकों और दुपहिया वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। देखते ही देखते सड़क पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शन कर रही महिलाओं का स्पष्ट कहना था कि जब तक प्रशासन अवैध पैकारी को पूरी तरह बंद कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का लिखित या ठोस आश्वासन नहीं देता, तब तक वे सड़क से नहीं हटेंगी।
चक्काजाम और उग्र प्रदर्शन की खबर मिलते ही ढीमरखेड़ा थाना पुलिस और स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी तत्काल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।अधिकारियों ने मोर्चा संभालते हुए प्रदर्शन कर रही महिलाओं और ग्रामीणों को समझाने का प्रयास शुरू किया। पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उनकी समस्याओं व मांगों को ध्यानपूर्वक सुना।
अधिकारियों ने स्वीकार किया कि शांति व्यवस्था बनाए रखना और अवैध गतिविधियों पर रोक लगाना प्रशासन की प्राथमिकता है। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने आक्रोशित महिलाओं को आश्वस्त किया कि गांव में आबकारी विभाग की मदद से सघन चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि अवैध शराब बेचने वालों को चिह्नित कर उनके खिलाफ आबकारी अधिनियम और संबंधित कानूनी धाराओं के तहत सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों द्वारा निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई का ठोस भरोसा दिए जाने के बाद महिलाओं का गुस्सा शांत हुआ। प्रशासनिक आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने चक्काजाम समाप्त करने का निर्णय लिया। महिलाओं के सड़क से हटने के बाद ही मार्ग पर फिर से यातायात बहाल हो सका और आवागमन सुचारू हुआ।
चक्काजाम समाप्त करते हुए महिला नेतृत्वकर्ताओं ने स्थानीय प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी भी दी है। उनका कहना है कि यदि आश्वासन के बावजूद गांव में अवैध शराब की पैकारी पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई गई और शराब माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई ढीली पड़ी, तो वे चुप नहीं बैठेंगी।
ग्रामीण महिलाओं ने कहा कि यह तो केवल एक शुरुआत थी, यदि समस्या का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में वे तहसील कार्यालय और जिला मुख्यालय का घेराव करने से भी पीछे नहीं हटेंगी। फिलहाल, इस प्रदर्शन के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप का माहौल है और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं।
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