आक्रोश : सिंहस्थ की तैयारी में स्थानीय हितों की अनदेखी का आरोप, 19 अक्टूबर से ओंकारेश्वर बंद का आह्वान
सिंहस्थ 2028 के लिए प्रस्तावित विकास कार्यों को लेकर तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में स्थानीय नागरिकों का असंतोष बढ़ता जा रहा है। विकास योजनाओं के कारण मकान, ...और पढ़ें
Publish Date: Sat, 17 Oct 2026 10:08:50 AM (IST)Updated Date: Sat, 17 Oct 2026 10:08:50 AM (IST)
ओंकारेश्वर में आयोजित बैठक में उपस्थित संत, जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोग। -नईदुनियाHighLights
- मकान-दुकान टूटने से पहले पुनर्वास और रोजगार की गारंटी चाहते हैं नागरिक
- विकास को विनाश बताकर स्थानीय संत और जन प्रतिनिधियों ने भरी हुंकार
- 19 सूत्री मांगों को लेकर अटका मामला
नईदुनिया प्रतिनिधि, ओंकारेश्वर (खंडवा) : सिंहस्थ 2028 के लिए प्रस्तावित विकास कार्यों को लेकर तीर्थनगरी ओंकारेश्वर में स्थानीय नागरिकों का असंतोष बढ़ता जा रहा है। विकास योजनाओं के कारण मकान, दुकान और आजीविका प्रभावित होने की आशंका के बीच नागरिकों, व्यापारियों और जनप्रतिनिधियों ने 19 अक्टूबर से नगर बंद करने का ऐलान किया है।
शुक्रवार रात को आयोजित सर्वदलीय बैठक में स्पष्ट किया गया कि जब तक प्रभावित परिवारों के पुनर्वास, उचित मुआवजे और रोजगार की सुरक्षा को लेकर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। बैठक में शामिल लोगों ने कहा कि वे सिंहस्थ के लिए होने वाले विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास की कीमत स्थानीय परिवारों को अपना घर और रोजगार खोकर नहीं चुकानी चाहिए। प्रशासन के सामने 16 सदस्यीय समिति के माध्यम से 19 सूत्रीय मांगें रखी गई हैं, लेकिन अब तक उन पर सहमति नहीं बन पाई है। इसी नाराजगी के चलते नगर बंद का निर्णय लिया गया।
विस्थापन से पहले तय हो प्रभावितों का भविष्य
नागरिकों ने मांग की कि किसी भी मकान या दुकान को हटाने से पहले प्रभावित परिवारों की सूची तैयार की जाए। प्रत्येक परिवार को मिलने वाले मुआवजे, वैकल्पिक आवास, भूखंड और पुनर्वास का लिखित विवरण दिया जाए। लोगों का कहना है कि केवल जमीन और भवन का मूल्य देना पर्याप्त नहीं है। वर्षों से स्थापित कारोबार, नियमित ग्राहकों और आय के साधन को होने वाले नुकसान का आकलन भी मुआवजे में शामिल किया जाना चाहिए।
दुकानदारों और किरायेदारों के सामने आजीविका का संकट
बैठक में छोटे व्यापारियों और किरायेदार दुकानदारों की समस्याओं पर भी चिंता जताई गई। मांग की गई कि प्रभावित दुकानदारों को मुख्य क्षेत्र में या पुराने व्यवसाय स्थल के आसपास वैकल्पिक दुकानें दी जाएं। स्थायी दुकानें बनने तक अस्थायी व्यवस्था की जाए। निजी जमीन पर किराये से कारोबार करने वालों को भी पुनर्वास में प्राथमिकता मिले, ताकि दुकान हटने के बाद उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा न हो। प्रभावितों को सामान हटाने और नई व्यवस्था करने के लिए पर्याप्त समय देने की मांग भी उठी।
विकास में सहयोग, लेकिन नगर को उजाड़ने का विरोध
सामाजिक कार्यकर्ता सुनील शर्मा ने वर्ष 2016 के विकास कार्यों का हवाला देते हुए कहा कि उस समय भी स्थानीय लोगों ने प्रशासन का सहयोग किया था। सांसद प्रतिनिधि गजेंद्र अग्रवाल ने कहा कि सड़क और अन्य कार्यों के लिए जरूरत के अनुसार जमीन देने में नागरिक सहयोग कर सकते हैं, लेकिन पूरे नगर को हटाने जैसी स्थिति स्वीकार नहीं की जा सकती।
नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि प्रकाश परिहार ने कहा कि मांगों का समाधान नहीं होने पर नगर परिषद स्थानीय नागरिकों के साथ खड़ी रहेगी। बैठक में संतों, विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, पार्षदों, व्यापारियों और वरिष्ठ नागरिकों ने हिस्सा लिया। अब प्रशासन के रुख पर आंदोलन की आगे की दिशा निर्भर करेगी।