
नईदुनिया प्रतिनिधि, खंडवा। जंगल काटने और वनभूमि पर अतिक्रमण के विरोध की रंजिश ने बोरखेड़ा खुर्द में खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। पिपलोद थाना क्षेत्र में सरपंच पति 56 वर्षीय रूमसिंग पुत्र बंगड़ा की हत्या के मामले का पुलिस ने रविवार को खुलासा कर दिया।
पुलिस ने तीन आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जबकि दो फरार हैं। पुलिस के अनुसार जुलाई में वन विभाग की अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कुछ मकान तोड़े गए थे। आरोपियों को संदेह था कि कार्रवाई में रूमसिंग की भूमिका थी। इसी रंजिश के चलते उसकी हत्या की साजिश की।
पुलिस के मुताबिक रूमसिंग रोज बोरखेड़ा खुर्द जाता था और कई बार देर शाम बाइक से घर लौटता था। इसी दिनचर्या की जानकारी आरोपितों को थी। घटना से तीन-चार दिन पहले से उसकी गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात एक आरोपित रूमसिंग की रेकी कर रहा था, जबकि चार अन्य हथियार लेकर नदी के पास घात लगाए बैठे थे।
रेकी करने वाला लगातार उसकी लोकेशन साथियों को देता रहा। रूमसिंग के नदी के पास पहुंचते ही आरोपितों ने लट्ठ मारकर उसे बाइक से गिराया। इसके बाद गर्दन पर कुल्हाड़ी और चाकू से वार किए गए। गंभीर चोटों के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस के अनुसार वारदात के बाद आरोपित वहां से चले गए।
इस हत्या का खुलासा करते हुए पुलिस अधीक्षक अगम जैन ने पत्रकार वार्ता में बताया कि शुक्रवार सुबह बोरखेड़ा के पास नदी किनारे रूमसिंग का खून से लथपथ शव मिला था। उसकी पत्नी और सरपंच ज्ञानीबाई सहित स्वजन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के बाद से चली आ रही रंजिश के आधार पर कुछ लोगों पर संदेह जताया था। जांच के दौरान डाग स्क्वाड भी संदिग्धों के घर के आसपास पहुंचा।
इसके बाद पुलिस ने इसी एंगल पर जांच आगे बढ़ाई। फोरेंसिक, साइबर सेल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर संदिग्धों से पूछताछ की गई। करीब 48 घंटे की जांच के बाद पुलिस ने पांच लोगों की संलिप्तता सामने आने का दावा किया। इस मामले में पुलिस अधीक्षक जैन द्वारा दस हजार रुपये का इनाम भी घोषित किया गया था। जो पुलिस टीम को दिया जाएगा।
पुलिस के अनुसार आमाखुजरी भिलाईखेड़ा निवासी साहदर उर्फ सरदार (40), अनिल (40) दोनों पुत्र कलसिंग और दिनेश (19) पुत्र नानसिंग को गिरफ्तार किया गया है। वहीं छतरसिंह पुत्र लाखासिंह और सुरमल पुत्र मुआसिंह फरार हैं। गिरफ्तार आरोपितों को रविवार को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया।
पुलिस ने पांचों के खिलाफ धारा 103(1) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज किया है। कार्रवाई में थाना प्रभारी विक्रम धार्वे के नेतृत्व में एसआbZ प्रेमसिंह जामोद, आरक्षक धीरज बेंजामिन तथा साइबर सेल के प्रधान आरक्षक जितेंद्र राठौर, सुनील लांडगे, रामनरेश यादव और आरक्षक नरेंद्र मुकाती की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
जिले के गुड़ी वन परिक्षेत्र में लंबे समय से अन्य जिलों से आकर अतिक्रमणकारियों के वन भूमि पर कब्जा करने से स्थानीय आदिवासी परेशान थे। इसे लेकर करीब दो माह पूर्व जंगल समर्थकों ने अतिक्रमणकारियों के खिलाफ जिला मुख्यालय पर प्रदर्शन कर विरोध में रैली निकाली थी। इसके जवाब में अतिक्रमणकारियों ने भी शक्ति प्रदर्शन करने के लिए रैली निकालकर वन विभाग और प्रशासन की खिलाफत की थी।
वहीं वन विभाग द्वारा जिला प्रशासन के साथ मिलकर गुड़ी वन परिक्षेत्र के आमाखुजरी और आसपास के जंगल में प्रभावी कार्रवाई कर अतिक्रमण हटाया था। बताया जाता है कि इसे लेकर दोनों खेमों में अंदरूनी खींचतान चल रही थी।
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