नईदुनिया प्रतिनिधि, खंडवा : देवी मूर्तियों के विसर्जन चल समारोह के दौरान खंडवा में उस समय अफरा तफरी मच गई, जब बांबे बाजार में आतिशबाजी के दौरान फ्रेंड्स कॉलोनी की महाकाली की मूर्ति में आग लग गई। घटना रात करीब 12:15 बजे की है।
आतिशबाजी के साथ ही यहां मूर्ति को गोल घुमाकर फायर शो दिखाया जा रहा था, तभी आतिशबाजी की चिंगारी मूर्ति पर गिरी और आग की पलटें उठने लगीं। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु आतिशबाजी के दृश्य को मोबाइल में कैद कर रहे थे, जैसे ही मूर्ति से आग की लपटें उठने लगी तो कुछ लोग यहां से दूर होने के लिए भागे तो कुछ ने मूर्ति के आसपास पहुंचकर आग बुझाने का प्रयास किया।
बड़ा हादसा हो सकता था
मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने सजगता दिखाई और तुरंत यहां दमकल वाहन बुलाकर मूर्ति पर पानी का छिड़काव किया गया। गनीमत रही कि समय रहते आग पर काबू पा लिया गया वरना बड़ा हादसा हो सकता था।
मैया को विदाई देने उमड़ा शहर, शक्ति की भक्ति में झूमे श्रद्धालु
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घंटाघर चौक पर खंडवा की महारानी का चल समारोह पहुंचा तो वातावरण जयकारों से गूंज उठा। -नईदुनिया
खंडवा: नवदुर्गा उत्सव के समापन के बाद देवी मूर्तियों के विसर्जन का सिलसिला बुधवार से शुरू हो गया।दोपहर 12 बजे के बाद कालोनियों और मोहल्लों में स्थापित अधिकांश मूर्तियों को विसर्जित करने के लिए श्रद्धालु उत्साह के साथ निकले।
कहीं ढोल तो कहीं डीजे की धुन पर थिरकते हुए श्रद्धालु मूर्तियों का विसर्जन करने इंदौर राेड पर झीलोद्यान स्थित अष्टभुजा कुंड तक पहुंचे।माता चौक की महारानी का विसर्जन चल समारोह जब स्थल से निकला तो दर्शन के लिए पूरा शहर उमड़ पड़ा। जगह-जगह फूलों की वर्षा हुई। ढोल-ताशों पर महिलाओं ने गरबा नृत्य किए।
नौ दिनों तक शक्ति की आराधना के बाद देवी मां की मूर्तियों का विसर्जन हुआ तो श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।स्थापना स्थलों से माता के जवारों के साथ ही मूर्तियां भी विसर्जन के लिए निकलीं। माताजी के जयकारे लगाते हुए विसर्जन चल समारोह में शामिल युवाओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। धार की ढोल पार्टी ने विसर्जन चल समारोह में रंग जमा दिया। ढोल की थाप पर युवाओं ने गरबा नृत्य किया। डीजे पर कभी भक्ति गीत तो कभी युवाओं को जागरूकता के संदेश दिए जाते रहे।
खंडवा की महारानी का चल समारोह शाम करीब छह बजे पुराने बस स्टैंड क्षेत्र से आगे बढ़ा। इसके बाद इंदिरा चौक, जवाहरगंज, मालीकुंआ और टपालचाल चौक सहित अन्य स्थलों की बड़ी मूर्तियां भी चल समारोह में शामिल हो गईं। मूर्तियों के चल समारोह का कारवां आगे बढ़ा तो गांधी भवन से बांबे बाजार तक का क्षेत्र दर्शनार्थियों की भीड़ से पट गया।
हर वर्ष की तरह घंटाघर चौक पर पहुंचते ही नवदुर्गा उत्सव समितियों ने अपनी-अपनी देवी मूर्तियों के आसपास फायर शो यानि आतिशबाजी की कलाबाजी दिखाई। आतिशबाजी की रोशनी से जगमगाती मूर्तियों को मोबाइल में कैद करने के लिए श्रद्धालुओं में होड़ लगी रही। घंटाघर चौक पर नवदुर्गा उत्सव समितियों को सम्मानित भी किया गया।
देर शाम तक 50 से अधिक मूर्तियां विसर्जित
नगर निगम के अष्टभुजा कुंड में सुबह से श्रद्धालु जवारे और मूर्तियां विसर्जित करने के लिए पहुंचने लगे थे। यहां दो बड़ी क्रेन की मदद से छोटी और बड़ी मूर्तियां विसर्जित की गईं। यहां दोपहर तक भगतसिंह चौक, अनूपनगर, गुरुआ मोहल्ला और जगदंबा पुरम, भगतसिंह चौक, टाकलीमोरी और पंधाना तक की मूर्तियां विसर्जन के लिए पहुंचीं।
नगर निगम द्वारा अष्टभुजा कुंड में इस बार मूर्तियों के विसर्जन के कुछ देर बाद इनके अवशेष निकाले जाने की भी व्यवस्था की गई थी। यही कारण रहा कि 26 फीट गहरे इस कुंड में बड़ी मूर्तियों के विसर्जन के दौरान किसी तरह की समस्या सामने नहीं आई।
सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रहा पुलिस बल
मूर्तियों के विसर्जन चल समारोह में सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस अधिकारियों ने बड़ी मूर्तियों के चल समारोह को शांतिपूर्ण रूप से पदमकुंड तक पहुंचाया। चल समारोह में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर करीब तीन सौ पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। अष्टभुजा कुंड में मूर्तियों के विसर्जन के दौरान पुलिस बल मौजूद रहा। यहां कुंड के आसपास भीड़ एकत्रित ना हो इसे लेकर भी सुरक्षा की पुख्ता व्यवस्था की गई थी। देर शाम तक अष्टभुजा कुंड में मूर्तियों का विसर्जन चलता रहा।
जाम लगने से परेशान हुए राहगीर
बड़ी मूर्तियों के विसर्जन चल समारोह के दौरान आमजन को जाम की स्थिति का सामना करना पड़ा। माता चौक की मूर्ति जब इंदिरा चौक पर पहुंची तो ओवर ब्रिज और सिविल लाइन की ओर आवागमन करने वाले वाहनों की कतार लग गई। ट्रैफिक जवान जाम दूर करने का प्रयास करते रहे। माता चौक से एसएन कॉलेज तक देवी मां की मूर्ति लाए जाने के दौरान पेड़ की डालियां और विद्युत तार परेशानी का कारण बने।