
नईदुनिया प्रतिनिधि, खंडवा, पुनासा। ग्राम सुलगांव में मध्यप्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड (एमपीपीटीसीएल) के उच्च दाब विद्युत लाइन के टावर खड़े करने के लिए महिला किसान के खेत में गड्ढे खोदने पर किसान भड़क गए।
टॉवर के लिए खोदाई के लिए ठेकेदार के साथ राजस्व और पुलिस की टीम पहुंचने और खेत मालिक महिला किसान पर दबाव बनाने से आक्रोशित किसान और राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ने प्रशासन पर कंपनी की मदद के आरोप लगाते हुए टॉवर के गड्ढ़ों में बैठ गए। अंतत: प्रशासन को काम रोकना पड़ा।
सनवाद से निमाड़खेड़ी की ओर रेलवे की 132 केवी लाइन के टावर खड़े करने का कार्य सुलगांव क्षेत्र में चल रहा है। मंगलवार अलसुबह बुलडोजर मशीन से खेत में गड्ढा खोदाई होने की खबर खेत मालिक बेवा महिला किसान तुलसीबाई पुत्री मगन को पता चली तो मौके पर पहुंच कर खोदाई रोकने की गुहार की।

टॉवर के गड्ढे में बैठे किसान। (नईदुनिया प्रतिनिधि)
सुनवाई नहीं होने पर महिला तुलसीबाई बुलडोजर मशीन के सामने खड़ी हो गई। महिला पुलिसकर्मियों ने तुलसीबाई को हटाने का प्रयास किया। वहां अन्य किसानाें की भीड़ जमा हो गई। इस बीच पुलिस और राजस्व बल की मौजूदगी में तुलसीबाई को दूर कर करीब सात गड्ढे करने का कार्य बुलडोजर से कर लिया गया।इसके बाद राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के पदाधिकारी और अन्य किसान भी पहुंचे।मौके पर हो रही सख्ती देख सौ से अधिक किसानों ने हंगामा शुरू कर दिया।इसके बाद पुलिस व राजस्व बल ने कार्य को रोका और दूर जाकर बैठ गए।
तुलसीबाई की तीन एकड़ भूमि में एक चार सौ केवी का पुराना टावर खड़ा हुआ है और अब 132 केवी के सात नए टावर खड़े किए जा रहे है।इसे लेकर किसानों ने कहा कि तुलसीबाई की पूरी भूमि टावर में ही चली जाएगी और मुआवजे के नाम पर सिर्फ दो लाख रुपये दिए हैं।इस राशि में कहीं भूमि क्रय करना भी संभव नहीं है।किसानों ने बताया कि यही कारण है कि पिछले चार वर्षों से तुलसीबाई के खेत में टावर खड़े होने का कार्य अटका पड़ा हुआ है।उनकी माने तो राजपत्र के अनुसार किसान के खेत में एक टावर खड़ा करने के लिए आठ लाख रुपये का भुगतान करना पड़ता है।इसे लेकर अन्य किसान न्यायालय में प्रकरण जीते हैं और इसका मुख्य कारण यह कार्य व्यावसायिक श्रेणी में आता है।
मौके पर मौजूद किसानों ने कंपनी और अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा कि तुलसीबाई को बिना सूचना दिए ही सुबह पांच बजे से आकर खेत में टावर खड़े करने का कार्य शुरू कर दिया गया।जानकारी के अनुसार टावर खड़े करने के लिए सात पटवारी, दस गांव के कोटवार पुलिस बल और मांधाता तहसीदार भी पहुंचे।यहां तक कि कार्य कर रही कंपनी पर आरोप लगाते हुए किसानों ने कहा कि यह चेहरा देखकर मुआवजा दे रहे हैं। तुलसीबाई के पड़ोस स्थित किसान को एक टावर के पांच लाख रुपये दिए गए।उन्हाेंने बताया कि कंपनी ने शुरू से ही सवा से आठ लाख रुपये तक अलग.अलग मुआवजा राशि वितरीत की है।
मामला गरमाते देख तुलसीबाई के पक्ष में राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के जिलाध्यक्ष त्रिलोक पटेल, करणी सेना और गुर्जर महासभा के पदाधिकारी भी पहुंचे।उन्होंने अधिकारियों के सामने जमकर हंगामा किया।इस पूरे मामले को लेकर धनगांव थाने का घेराव और तहसीलदार के साथ कंपनी पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की।उन्होंने कहा कि अगर एफआइआर दर्ज नहीं हुई तो इंदौर-ऐदलाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग को जाम किया जाएगा।
राजपत्र के अनुसार किसान के खेत में एक टावर के आठ लाख रुपये देने का प्रविधान है।मंगलवार को किसान तुलसीबाई के साथ अन्याय किया जा रहा था।जब हमने जाकर कार्य का विरोध किया तो धनगांव थाना प्रभारी लाठीचार्ज करने की अनुमति लेने की धमकी दे रहे थे।तीन एकड़ की भूमि में आठ टावर के बाद किसान की खेती के लिए भूमि कहां बचेगी। -त्रिलोकचंद्र पटेल, जिलाध्यक्ष राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ
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