खंडवा, बीड़, नईदुनिया प्रतिनिधि। बीड़ के निकट स्थित संत सिंगाजी महाराज की समाधि के दर्शन के लिए शरद पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं का दिनभर तांता लगा रहा। सिंगाजी महाराज के जयकारों की गूंज के बीच ढाई लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने यहां पहुंच कर संत के प्रति अगाध आस्था जताई। मेला क्षेत्र से मंदिर परिसर तक जन सैलाब और समाधि के चारों ओर इंदिरा सागर बांध का बैक वाटर नजर आया। शाम को झाबुआ से आया मुख्य निशान पेश किया गया। अपने आराध्य संत के दर्शन उपरांत शाम को महाआरती में हजारों भक्त शामिल हुए। रात में आकर्षक आतिशबाजी से पूर्णिमा पर आसमान रंग बिरंगी रोशनी से जगमगा उठा। रविवार को सिंगाजी महाराज की समाधि स्थल पर भारी भीड़ उमड़ी।

पूर्णिमा पर सुबह समाधि का अभिषेक और पूजन के साथ शुरू हुआ धार्मिक अनुष्ठान और दर्शन का सिलसिला देर रात तक चला। सिंगाजी को प्रिय कच्ची केरी, घी और शकर चिरौंजी का प्रसाद अर्पित करने के साथ ही कपड़े के ध्वज (निशान) पेश किए गए। दोपहर में 12 बजे भोग और शाम को परंपरानुसार झाबुआ के राजा बहादुर के परिवार की ओर से मुख्य निशान समाधि पर पेश किया गया। इस दौरान मंदिर के समक्ष बनी दीपमाला में 165 दीप प्रज्जवलित कर महाआरती की गई। उपस्थित श्रद्धालुओं के हाथों में जगमगाते हजारों दीपकों से समाधि क्षेत्र जगमगा उठा। आरती के बाद रंग-बिरंगी आतिशबाजी की भी गई।

ग्रामीण और पशुपालक पहुंचे

संत की समाधि पर निशान चढ़ाने के लिए पूर्व और पश्चिम निमाड़ के अलावा विभिन्न् जिलों ओर प्रदेशों से भी ग्रामीण और पशुपालक सिंगाजी के भजन गाते हुए पैदल यात्रा कर निशान लेकर यहां पहुंचे। सुबह से शाम तक बैकवाटर पर बने दो किलोमीटर लंबे पुल पर लोगों का हुजूम लगा रहा। समाधि, अखंड ज्योत और चरण पादुका के लोगों ने दर्शन किए। प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए आवश्यक व्यवस्था मंदिर क्षेत्र में की गईं। सेवाभावी लोगों की ओर से श्रद्धालुओं के लिए भंडारे और चाय-नाश्ते की व्यवस्था जगह-जगह की गई। मूंदी और बीड़ में भी स्टॉल लगाए गए।

विशेष रूप से चढ़ती है केरी

मन्नत पूर्ण होने पर सिंगाजी को हलवे की प्रसादी चढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में कड़ावा किया गया। मान्यता है कि मन्नत के लिए यहां उल्टा सातिया बनाया जाता है। मन्नत पूरी होने पर यहां आकर सीधा सातिया बनाते हैं। समाधि पर प्रमुख रूप से शुद्ध घी और शकर चढ़ाने के बाद भी चीटी नहीं होती। इसी तरह आम का बौर और कच्ची केरी भी विशेष रूप से चढ़ाई जाती है। इस सीजन में यह कहां से आते है कोई नहीं जानता। संत सिंगाजी की समाधि के प्रमुख मंहत रतनलालजी ने बताया कि यहां चढ़ने वाली केरी को लेकर कई मान्यताएं है। इसे मुख्य रूप से निसंतान महिलाओं को संतान प्राप्ति के लिए केरी को प्रसादी के रूप में दिया जाता है।

35 क्विंटल देशी घी चढ़ाया

सिंगाजी महाराज की समाधि पर 35 क्विंटल से अधिक देशी घी भक्तों द्वारा चढ़ाया जा चुका है। मंदिर के मंहत रतनलाल ने बताया कि यहां चढ़ने वाले घी का उपयोग प्रसादी के लिए बनने वाला हलवे और ओंकारेश्वर व नेमावर स्थित गवली समाज की धर्मशाला में पूजन के लिए दिया जाता है। इसके अलावा खुटला, छिरपुर में बने सिंगाजी के मंदिर तथा होशंगाबाद के रामजी बाबा मंदिर जाता है। सिंगाजी की समाधि पर दर्शन के आने वाले श्रद्धालुओं को दाल-बांटी और प्रसादी बनाने के लिए भी घी नि:शुल्क दिया जाता है।

Posted By: Prashant Pandey