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सिंहस्थ में श्रद्धालुओं को बड़ा झटका, उज्जैन से ओंकारेश्वर के लिए नहीं मिलेगी डायरेक्ट ट्रेन, सितंबर 2029 तक बढ़ा इंतजार

सिंहस्थ में श्रद्धालुओं को ओंकारेश्वर से उज्जैन के लिए ट्रेन सुविधा का लाभ नहीं मिल सकेगा। इसके लिए सितंबर 2029 तक इंतजार करना पड़ेगा।

By Manish KareEdited By: Dheeraj Belwal
Publish Date: Mon, 18 May 2026 08:30:51 PM (IST)Updated Date: Mon, 18 May 2026 08:30:51 PM (IST)
सिंहस्थ में श्रद्धालुओं को बड़ा झटका, उज्जैन से ओंकारेश्वर के लिए नहीं मिलेगी डायरेक्ट ट्रेन, सितंबर 2029 तक बढ़ा इंतजार
ट्रेन शुरू होने का लंबे समय से लोग इंतजार कर रहे हैं। नईदुनिया

HighLights

  1. रेलवे बोर्ड ने दिए ₹1,500 करोड़, पर काम नहीं
  2. 18 साल बाद भी 180 किमी गेज कन्वर्जन बाकी
  3. वन विभाग और टेंडर प्रक्रिया में उलझा प्रोजेक्ट

नईदुनिया प्रतिनिधि, खंडवा। सिंहस्थ में श्रद्धालुओं को ओंकारेश्वर से उज्जैन के लिए ट्रेन सुविधा का लाभ नहीं मिल सकेगा। इसके लिए सितंबर 2029 तक इंतजार करना पड़ेगा। वैसे इस ट्रैक के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए रेलवे बोर्ड ने 1500 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। देखना ये है कि पश्चिम रेलवे और दक्षिण मध्य रेलवे इस वित्तीय वर्ष में इसको खर्च कर पाते हैं।

विदित हो कि वर्ष 2008 में रतलाम, महू, खंडवा, अकोला के बीच 472 किमी गेज कंवर्जन को केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिली थी, जिसे वर्ष 2013 में पूरा करना था। 18 वर्ष बीतने के बाद अभी भी लगभग 180 किमी गेज कन्वर्जन होना बाकी है। बहुप्रतीक्षित महू-खंडवा-अकोला गेज कनवर्जन का कार्य काफी पिछड़ चुका है। दो दशक से पश्चिम रेलवे और दक्षिण मध्य रेलवे अपने क्षेत्र में गेज कंवर्जन का कार्य कर रहे हैं। इस दौरान खंडवा से सनावद तक मेमू ट्रेन का संचालन हो रहा है।


तीन साल में नहीं हो सके टनल के टेंडर

वर्ष 2015 के बाद से इस रेल परियोजना को बजट में बड़ी राशि का आवंटन हो रहा है, लेकिन रेलवे इसे खर्च नहीं कर पा रहा है। वन विभाग की अनुमति और भूमि अधिग्रहण में देरी का हमेशा हवाला देकर इति श्री कर ली जाती है। ओंकारेश्वर में नर्मदा पुल तीन साल से बन रहा है। चोरल-पातालपानी के बीच तीन साल में टनल के टेंडर भी नहीं हो सके हैं। इधर दक्षिण मध्य रेलवे द्वारा तुकाईथड़ से अकोट के बीच बनने वाली सात किमी की टनल के टेंडर और टनल के काम शुरू करने की कोई गंभीरता नहीं दिख रही है।

जनता को 300 किमी घूमकर यात्रा करने की मजबूरी

ना ही खंडवा अमलाखुर्द के बीच ढाई साल पहले हुए सीआरएस के बाद अभी इसका विद्युतीकरण किया है। कुल मिलाकर रेलवे विभाग द्वारा भूमि अधिग्रहण और वन विभाग की अनुमति की आड़ लेकर बार बार कार्य पूरा करने की गाइड लाइन बदल कर इस गेज कन्वर्जन परियोजना को जल्द से पूरा करने में दिलचस्पी नहीं दिख रही है। मध्य रेल परामर्शदात्री समिति सदस्य मनोज सोनी का कहना है कि महू खंडवा अकोला गेज कंवर्जन कार्य में ढिलाई के कारण क्षेत्र की जनता रेल सुविधा से वंचित है। लोगों को तीन सौ किमी घूमकर यात्रा करने को मजबूर होना पड़ रहा है। परियोजना की लागत बढ़ रही है। रेलवे को भी राजस्व की हानि हो रही है।

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अलग-अलग रेल खंडों के निर्माण की नई समय-सीमा

  • महू खंडवा अकोला गेज कंवर्जन के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1500 करोड़ का बजट आवंटन।
  • 4.6 किमी पातालपानी-बड़ियां तक नवंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य।
  • 36.6 किमी बड़िया-डेका-कुलथाना-राजपुरा तक सितंबर 2029।
  • राजपुरा-चोरल 8.90 किमी दिसम्बर 2028 तक पूरा करना।
  • मुक्तियारा-बलवाड़ा से ओंकारेश्वर तक 20.7 किमी फरवरी 2027 तक पूरा करना।
  • चोरल-मुखतियारा बलवाड़ा तक 15.1 किमी दिसंबर 2027 पूरा करने की समय सीमा निर्धारित की है।
  • ओंकारेश्वर से पातालपानी तक 86 किमी गेज कंवर्जन सितंबर 2029 तक पूरा किया जाएगा।