
नईदुनिया प्रतिनिधि, खंडवा। मध्य प्रदेश पुलिस का हैरतअंगेज कारनामा खंडवा जिले के नर्मदानगर थाने में सामने आया है। सिंचाई परियोजना में क्रेन आपरेटर रहे व्यक्ति पर उनकी मौत के लगभग दो माह बाद लापरवाही से वाहन चलाकर सूअर को मारने की एफआइआर दर्ज की गई है। प्रकरण में सवाल उठ रहा है कि भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की जिस धारा 106 (1) में आरोपित पर लापरवाही से किसी व्यक्ति को मारने पर एफआइआर दर्ज करने का प्रविधान है, उसका प्रयोग सूअर के मरने पर क्यों किया गया।
जबलपुर के गोरखपुर थाना क्षेत्र निवासी मुकेश पटेल एलएंडटी कंपनी के माध्यम से खंडवा जिले की सिंचाई परियोजना में क्रेन आपरेटर थे। 15 अगस्त की रात वह अपने साथी किशोरी के साथ बाइक से जा रहे थे। खंडवा में पुनासा-सनावद मार्ग पर जंगली सूअर दौड़ते हुए सड़क पर आया और उनकी बाइक से टकरा गया। इससे बाइक फिसल गई और टक्कर से सूअर की मौत हो गई, जबकि मुकेश गंभीर रूप से घायल हो गए। स्वजन जबलपुर ले गए, जहां 17 अगस्त को उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई।
यह भी पढ़ें- टक्कर मारकर भाग रही कार को पकड़ने दौड़ा युवक, पीछा करने पर बाइक सवार को 100 फीट तक घसीटा, मौत
नर्मदानगर थाना प्रभारी धीरेश धारवाल का कहना है कि जबलपुर से मर्ग डायरी आने के बाद मृतक के घायल साथी के बयान दर्ज किए। उसने बताया कि मुकेश लापरवाही से बाइक चला रहा था, जिससे जंगली सूअर की मौत हुई और दोनों घायल हो गए।
इसी बयान के आधार पर केस दर्ज किया है। वहीं, विशेषज्ञ अधिवक्ता विजय कुमार का कहना है कि घायल को क्लेम मिलने में आसानी होने के कारण पुलिस ने ऐसा किया होगा, बाद में कोर्ट में खात्मा रिपोर्ट दाखिल कर देती है।