Sawan 2023: चांदी की पालकी में होकर सवार होकर भगवान ओंकारेश्वर ने किया नगर भ्रमण
सावन का सातवां सोमवार: भोलेशंभू-भोलेनाथ के जयकारों से गूंजी तीर्थनगरी, महासवारी में झूमे भक्त। जगह.जगह पुष्प वर्षा और कपूर आरती कर पालकी का किया गया स ...और पढ़ें
By Hemant Kumar UpadhyayEdited By: Hemant Kumar Upadhyay
Publish Date: Mon, 21 Aug 2023 07:40:10 PM (IST)Updated Date: Tue, 22 Aug 2023 08:52:44 AM (IST)
भगवान ओंकारेश्वर को नौका विहार के दौरान कोटितीर्थ घाट पर लगी भक्तों की भीड़।HighLights
- ओंकारेश्वर भगवान् की पालकी यात्रा मंदिर परिसर से निकलकर कोटितीर्थ घाट पहुंची।
- गोमुख घाट पर ओंकारेश्वर. ममलेश्वर दोनों सवारियों का मिलन हुआ फिर महासवारी शुरू हुई ।
- चारों तरफ गुलाल और गुलाब की वर्षा होने से मार्ग सराबोर हो गए।
Sawan 2023: ओंकारेश्वर, नईदुनिया न्यूज। बारह ज्योतिर्लिंग में से चतुर्थ ज्योतिर्लिंग भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर ने सावन के सातवें सोमवार को फूलों से सजी चांदी की पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण किया। साल में एक बार सावन में निकलने वाली महासवारी में बैंड-बाजे, डमरू,झांझ,मजीरे सहित हजारों भक्त इसमें शामिल हुए।
ढोल-ताशे की गूंज पर झूमते रहे शिव भक्त
ढोल-ताशे की गूंज पर झूमते शिव भक्तों के भोले शंभू-भोलेनाथ के जयघोष की तीर्थनगरी में गूंज रही। हर कोई भोलेनाथ की भक्ति और गुलाल में सराबोर था। सोमवार दोपहर दो बजे ओंकारेश्वर मंदिर से जब महासवारी शुरू हुई। नर्मदा नदी के उत्तर तट पर कोटितीर्थ घाट और दक्षिण तट पर स्थित गौमुख घाट पर भगवान् ओंकारेश्वर और ममलेश्वर की पंचमुखी प्रतिमा का पंचामृत रुद्राभिषेक ब्राह्मणों द्वारा वैदिक मंत्रों से किया गया। करीब दो घंटे चले अभिषेक- पूजन के बाद भोलेनाथ को पालकी में बैठाकर नर्मदा नदी में नौका विहार कराया गया।
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पुष्प वर्षा कर स्वागत व पूजन
नगर भ्रमण पर निकले ओंकार-ममलेश्वर का विभिन्न संगठनों ने जगह.जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत व पूजन किया। दिनभर बाबा भोलेनाथ के जयकारे गूंजते रहे।
यहां से होकर निकली पालकी
ओंकारेश्वर भगवान् की पालकी यात्रा मंदिर परिसर से निकलकर कोटितीर्थ घाट पहुंची यहां से पूजन अभिषेक के बाद नौकाविहार करते हुए गोमुख घाट पर ओंकारेश्वर. ममलेश्वर दोनों सवारियों का मिलन हुआ फिर महासवारी शुरू हुई । जो ममलेश्वर मंदिर होते हुए गजानंद आश्रम, पुराना बस स्टैंड मार्ग से जेपी चौक पहुंची।
यहां से
ममलेश्वर भगवान् की पालकी पुनः मंदिर की और लौट गई तथा भगवान् ओंकारेश्वर जी की पालकी पुराने पुल से होते हुए बड़ चौक पहुंची। यहां से मुख्य बाजार होते हुए रात
ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचने पर महासवारी यात्रा का विश्राम होगा।
सावन के सातवें सोमवार को भगवान की पालकी में जहां घोड़े ,बग्गी ऊंट के साथ.साथ ढोलनगाड़ों के बीच जय भोलेनाथ जय बम बम के शंखनाद से ओंकार नगरी गुंजायमान हो रही थी। चारों तरफ गुलाल और गुलाब की वर्षा होने से मार्ग सराबोर हो गए। पूरा नगर मानव भोलेनाथ के जयकारे के बीच भक्ति भाव से भक्तिमय हो गया। महासवारी ने करीब तीन किलोमीटर का सफर लगभग आठ घंटे में पूरा किया।