
Sawan 2023: खंडवा (नईदुनिया प्रतिनिधि)। सावन के छटवें सोमवार को भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर ने नगर भ्रमण किया। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। ज्योतिर्लिंग मंदिर में भी सुबह चार बजे से दर्शन का सिलसिला शुरू होने के साथ ही कतार लगना शुरू हो गया था। रविवार को भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही।
सावन के सातवे सोमवार 21 अगस्त को भगवान ओंकारेश्वर-ममलेश्वर की महासवारी निकलेगी। इसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होगें। यात्रा का जगह-जगह गुलाल और पुष्पवर्षा से स्वागत किया जाएगा। सावन के अंतिम सोमवार को निकलने वाली इस महासवारी को शिवभक्तों को इंतजार रहता है।
सावन के छटवें सोमवार को भगवान ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग का परंपरा अनुसार पूजन-अभिषेक दोपहर में कोटिर्तीथ घाट पर किया गया। इसमें मांधाता विधायक नारायण पटेल शामिल हुए। मंदिर से ढ़ोल-ढ़माके के साथ जय शिव के जयघोष के साथ पंड़ित-पुजारी और भक्त उत्साह से भगवान की पालकी लेकर रवाना हुए। वहीं भगवान ममलेश्वर का गोमुख घाट पर पूजन-अभिषेक किया गया।
घाटों पर पूजन-अभिषेक पश्चात दोनों भगवान की मूर्तियों को नर्मदा नदी में नौका विहार कराया गया। गौमुख घाट से बालवाड़ी होते हुए भगवान ओंकारेश्वर और ममलेश्वर एक साथ भ्रमण कर जेपी चौक पहुंचे। यहां से ममलेश्वर महादेव की पालकी ममलेश्वर मंदिर और भगवान ओंकारेश्वर की पालकी झूला पुल से मंदिर की ओर रवाना हुई। रात्रि में शयन आरती पश्चात मंदिर के पट रात्रि में दस बजे के बाद बंद हुए।
मंदिर ट्रस्ट के पंड़ित आशीष दीक्षित ने बताया कि सावन का छटवें सोमवार को भगवान को नगर भ्रमण करवाया गया। परंपरा अनुसार कोटीतीर्थ घाट पर भगवान ओंकारेश्वर का पंड़ित और विधायक नारायण पटेल की मौजूदगी में वेदाचार्य पंड़ित राजराजेश्वर दीक्षित के आचार्यत्व में किया गया। सावन में बड़ी संख्या में कावड़ यात्री भी ओंकारेश्वर पहुंच रहे है। सावन की अंतिम सवारी 21 अगस्त को महासवारी के रूप में निकलेगी। इस दौरान नगर में फूलों और गुलाल से श्रद्धालुओं द्वारा सवारी का स्वागत किया जाएगा।
ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर में श्रावण के छठे सोमवार शिव भक्तों का बड़ी संख्या में आगमन हुआ। अवकाश होने के कारण तीन दिनों में दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने ओंकारेश्वर पहुंचकर आस्था की नर्मदा में डुबकी लगाकर बाबा ओंकारेश्वर -ममलेश्वर के दर्शनों का लाभ लिया। भीड़ होने के कारण कई श्रद्धालुओं ने बिना दर्शन किए लौटना पड़ा। कलेक्टर के निर्देश पर प्रशासन द्वारा किए गए इंतजाम के बावजूद पांच से छह घंटे में श्रद्धालुओं को दर्शन हो सकें।