
नईदुनिया प्रतिनिधि, खंडवा। फर्जी दस्तावेजों के जरिए शासकीय नौकरी हासिल करने के मामले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाया है। इसी कड़ी में कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने कार्रवाई करते हुए दोषसिद्ध प्राथमिक शिक्षक मोहन सिंह काजले को शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया है। खास बात यह है कि बर्खास्तगी के साथ उन्हें दिया जा रहा जीवन निर्वाह भत्ता भी तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया गया है।
पुलिस ने गिरफ्तारी भी की थी
प्रशासनिक आदेश के अनुसार मोहन सिंह काजले पूर्व में विकासखंड खालवा की शासकीय प्राथमिक शाला रायपुरढाना में पदस्थ थे। उन पर आरोप था कि उन्होंने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खरगोन जिले में शासकीय सेवा प्राप्त की थी। मामला सामने आने के बाद वर्ष 2020 में उन्हें निलंबित कर दिया गया था और पुलिस ने गिरफ्तारी भी की थी।
तीन वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा
हाल ही में द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश खंडवा की अदालत ने प्रकरण में सुनवाई पूरी करते हुए आरोपित शिक्षक को विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया। न्यायालय ने उन्हें धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी दस्तावेजों के उपयोग और आपराधिक षड्यंत्र जैसे गंभीर अपराधों में तीन वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है।
विभागीय स्तर पर कार्रवाई तेज
न्यायालय के फैसले के बाद जिला प्रशासन ने विभागीय स्तर पर कार्रवाई तेज करते हुए मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियमों के तहत शिक्षक की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया। आदेश में स्पष्ट कहा गया कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी प्राप्त करना शासकीय सेवा की गरिमा के खिलाफ गंभीर कदाचार है और ऐसे व्यक्ति को सेवा में बनाए रखना जनहित में उचित नहीं माना जा सकता।