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खरगोन में 207 साल पुराना स्कूल भवन, 13 साल से जर्जर घोषित, 325 विद्यार्थियों पर मंडरा रहा खतरा

वर्ष 1819 में मंडलेश्वर नगर अंग्रेजी सरकार के अधीन आ गया था। उस समय यहां ब्रिटिश रेजिडेंट के लिए रेजिडेंट हाउस की स्थापना की गई थी। इसी रेजिडेंट हाउस ...और पढ़ें

By Vivek ParasharEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Wed, 17 Jun 2026 01:23:19 PM (IST)Updated Date: Wed, 17 Jun 2026 01:23:19 PM (IST)
खरगोन में 207 साल पुराना स्कूल भवन, 13 साल से जर्जर घोषित, 325 विद्यार्थियों पर मंडरा रहा खतरा
सालों से जर्जर भवन में लग रहा है स्कूल। (नईदुनिया प्रतिनिधि)

HighLights

  1. पूर्व व वर्तमान विधायक के प्रस्ताव भी फाइलों से बाहर नहीं निकल पाए
  2. जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर 325 विद्यार्थी
  3. अंग्रेजों के शासनकाल में वर्ष 1819 में बने इस भवन में अब भी स्कूल संचालन हो रहा है

हरचरणसिंह मुछाल, नईदुनिया न्यूज, मंडलेश्वर (खरगोन)। प्रशासनिक लापरवाही और आदेशों के क्रियान्वयन में लेटलतीफी का उदाहरण है जिले के मंडलेश्वर का महात्मा गांधी शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय भवन।

अंग्रेजों के शासनकाल में वर्ष 1819 में बने इस भवन में अब भी स्कूल संचालन हो रहा है। वहीं इस भवन को नगर निकाय व पीडब्ल्यूडी करीब 13 साल पहले जर्जर घोषित कर चुके हैं, बावजूद इसके इसी स्कूल भवन में करीब 325 बच्चे अध्ययनरत हैं।

पूर्व विधायक डा. विजयलक्ष्मी साधौ और वर्तमान विधायक राजकुमार मेव इस स्कूल भवन के जीर्णोद्धार के लिए प्रस्ताव दे चुके लेकिन कहानी फाइलों में उलझ कर रह गई है। स्थिति यह है कि विद्यार्थी अपनी जान जोखिम में डालकर यहां पढ़ने को मजबूर हैं।


यह है स्कूल भवन का इतिहास

इतिहास के पन्नो में जर्जर स्कूल भवन का स्वर्णिम इतिहास दर्ज है। वर्तमान स्कूल भवन ब्रिटिश काल का है। वर्ष 1819 में मंडलेश्वर नगर अंग्रेजी सरकार के अधीन आ गया था। उस समय यहां ब्रिटिश रेजिडेंट की नियुक्ति की गई थी, तब उनके लिए रेजिडेंट हाउस की स्थापना की गई थी जो निमाड़ में ब्रिटिश सत्ता का मुख्यालय था। इसी रेजिडेंट हाउस को साल 1956 में तत्कालीन प्रदेश सरकार ने शासकीय स्कूल का दर्जा दिया था। तब से आज तक स्कूल का संचालन इस भवन में हो रहा है।

पूरा भवन जर्जर घोषित तो कोई हिस्सा सुरक्षित कैसे

ज्ञात हो कि महात्मा गांधी शासकीय विद्यालय जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत आता है। विडंबना ये है कि विभाग द्वारा जर्जर स्कूल भवन पर कोई ध्यान नही दिया जा रहा है। जिम्मेदार अधिकारीयो से चर्चा की जाती है तो यह कह कर पल्ला झाड़ लिया जाता है कि स्कूल भवन के जर्जर हिस्से में कक्षाएं लगाना बंद कर दिया गया है। स्कूल में सही सलामत हिस्से में बच्चों की कक्षाएं लगाई जा रही हैं। अब सवाल यह है कि पूरे भवन को जर्जर घोषित किया जा चुका है तो इसका कोई हिस्सा सुरक्षित कैसे हो सकता है।

सामाजिक संस्था और पूर्व विद्यार्थी हैं प्रयासरत

स्थानीय सामाजिक संस्था जन जागृति मंच व 1983 की बैच के पूर्व विद्यार्थियों ने विगत कई वर्ष से शासकीय स्कूल भवन के जीर्णोद्धार का अभियान छेड़ रखा है। संस्था ने समय-समय पर विभिन्न मंचों पर स्कूल भवन के जीर्णोद्धार के मुद्दे को प्रभावी तरीके से रखा है। इसी अभियान के परिणामस्वरूप साल 2019 मे तत्कालीन विधायक व कैबिनेट मंत्री डा. विजयलक्ष्मी साधौ ने जनजातीय कार्य विभाग को भवन के जीर्णोद्धार या नए भवन के लिए डीपीआर बनाने के लिए निर्देशित भी किया था। इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद पिछले वर्ष वर्तमान विधायक राजकुमार मेव के पत्राचार के बाद नवीन भवन पुराने जनजाति छात्रावास को तोड़कर बनाने का प्रस्ताव किया गया, जो अब फाईलों में ही है।

नया भवन बनने तक यहीं संचालित होगी स्कूल

भवन जीर्ण-शीर्ण है, इसकी जानकारी हमारे द्वारा उच्च विभाग को लगातार दी जा रही है। मीडिल स्कूल तक के बच्चों को प्रायमरी स्कूल के नए भवन मे शिफ्ट कर दिया है। विभागीय जानकारी अनुसार नवीन भवन का प्रस्ताव पारित हो गया है, लेकिन नवीन भवन के बनने तक स्कूल यहीं संचालित होगी। - जेके सोनी, संकुल प्राचार्य

पुन: भेज रहे हैं प्रस्ताव

स्कूल भवन जीर्ण-शीर्ण है। पूर्व में इसका प्रस्ताव भेजा गया था लेकिन नहीं हुआ। अब एक बार फिर इस प्रस्ताव बनाकर भेजा जाएगा। वहीं जल्द ही भवन का निरीक्षण कर वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर भी विचार करेंगे। - कविता आर्य, सहायक आयुक्त जनजातिय कार्य विभाग खरगोन

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