
नईदुनिया प्रतिनिधि, खरगोन। महेश्वर विधानसभा क्षेत्र के मंडलेश्वर स्थित नर्मदा तट पर सफाई के दौरान एक गंभीर मामला सामने आया है। नदी के पानी में तैरते व तट किनारे सैकड़ों की संख्या में लावारिस मतदाता पहचान पत्र (वोटर आइडी) पाए गए। इन पहचान पत्रों पर दर्ज पते के अनुसार ये सभी कार्ड इंदौर शहर (तिलक नगर व आस्था पैलेस आदि) के हैं।

इंदौर से करीब 90 किलोमीटर दूर मंडलेश्वर नर्मदा घाट पर इतनी बड़ी संख्या में वोटर कार्ड मिलने से प्रशासनिक व राजनीतिक हलकों में खलबली मच गई है। रविवार को 'निस्वार्थ सेवा समिति' द्वारा नर्मदा घाट पर सफाई का कार्य किया जा रहा था, तभी सदस्यों को जल में तैरते हुए वोटर आईडी दिखाई दिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम के नेतृत्व में राजस्व विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचाकर पंचनामा तैयार किया और सभी पहचान पत्रों को जब्त कर लिया।

घटना उजागर होते ही जिला कांग्रेस कमेटी व ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के पदाधिकारी व कार्यकर्ता थाने पहुंचे और विरोध प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं ने इसे वोट चोरी का प्रत्यक्ष सबूत करार देते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने की मांग उठाई।
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मांगों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ता थाने में ही धरने पर बैठ गए। नेताओं का कहना है कि सैकड़ों की संख्या में किसी अन्य शहर के वोटर आईडी मिलना सोची-समझी धांधली की ओर इशारा करता है। यदि पुलिस निष्पक्ष एफआईआर दर्ज नहीं करती है, तो आगामी दिनों में थाने का घेराव किया जाएगा।
इंदौर के सैकड़ों वोटर आइडी नर्मदा में मिलना सीधे तौर पर वोट चोरी का सबूत है। किसी आम व्यक्ति के पास इतनी बड़ी संख्या में सरकारी पहचान पत्र होना संभव नहीं है। इंदौर के वोटर कार्ड मंडलेश्वर कैसे पहुंचे, इन्हें कौन लाया और पानी में फेंकने के पीछे क्या मंशा थी, इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। हमारी मांग है कि मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया जाए। यदि पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया, तो आने वाले दिनों में सैकड़ों कार्यकर्ता थाने का घेराव करेंगे।- रवि नाईक, जिला कांग्रेस अध्यक्ष
सफाई के दौरान वोटर आइडी मिलने की सूचना मिलते ही एसडीएम के नेतृत्व में राजस्व टीम को तुरंत मौके पर भेजा गया। टीम ने पंचनामा बनाकर कार्डों की जब्ती की कार्रवाई की है। कांग्रेस नेताओं द्वारा दिए गए आवेदन पर थाना प्रभारी को जांच सौंपी गई है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा प्रथम दृष्टया कार्ड देखने वाली निस्वार्थ सेवा समिति के सदस्यों को भी जांच में शामिल कर उनके बयान दर्ज किए जाएंगे।- श्वेता शुक्ला, एसडीओपी, मंडलेश्वर