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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 19, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Jam Gate Tourist Place: सीमांकन के बाद निमाड़ का हिस्सा निकला जाम गेट

Jam Gate Tourist Place: महू-मंडलेश्वर मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक जाम गेट अहिल्याकालीन है।

By Nai Dunia News NetworkEdited By: Nai Dunia News Network
Publish Date: Tue, 19 Oct 2021 06:58:31 PM (IST)Updated Date: Wed, 20 Oct 2021 09:24:54 AM (IST)
Jam Gate Tourist Place: सीमांकन के बाद निमाड़ का हिस्सा निकला जाम गेट

Jam Gate Tourist Place:बबलाई (खरगोन) (नईदुनिया न्यूज)। मालवा-निमाड़ की सीमा पर बना अहिल्याकालीन ऐतिहासिक जाम दरवाजा अब आधिकारिक रूप से पश्चिम निमाड़ जिले की महेश्वर तहसील की सीमा में आ गया है। बीते दिनों संभागायुक्त के निर्देशन में हुए सीमांकन में यह पाया गया। जाम गेट के सुरक्षा कर्मी सरदार गिरवाल, जितेंद्र बारिया ने बताया था कि मालवा क्षेत्र की ग्राम पंचायत छोटी जाम ने इस इमारत को अपने क्षेत्र में होने की बात कही थी। इसके बाद वहां के प्रतिनिधियों ने इसके रखरखाव की जिम्मेदारी मालवा क्षेत्र को देने की बात कहकर उच्च अधिकारियों से शिकायत की थी, जिससे विवाद की स्थिति बनी थी। मंडलेश्वर एसडीएम ओमनारायणसिंह बड़कुल ने बताया कि संभागायुक्त के निर्देश पर गत दिनों दोनों जिलों के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने जाम गेट का दौरा कर इमारत व आसपास की जगह का सीमांकन किया था।

टीम में महू एसडीएम पवन जैन, मंडलेश्वर एसडीएम सहित अन्य अधिकारी शामिल थे। दल ने 14 अक्टूबर को दोपहर 12 बजे से शाम करीब पांच बजे तक सीमांकन कार्य किया। दल के सदस्यों ने सीमांकन के बाद ऐतिहासिक इमारत को खरगोन जिले के महेश्वर तहसील के ग्राम पंचायत बागदरा सीमा में होना बताया। एसडीएम बड़कुल ने बताया की सीमांकन की पूरी रिपोर्ट संभागायुक्त को भेज दी गई है।


बागदरा पंचायत कर रही रख रखाव

अहिल्याकालीन इमारत का रख रखाव जिला प्रशासन के निर्देश पर बागदरा पंचायत कर रही है। पर्यटकों को इमारत में प्रवेश के लिए 10 रुपये का शुल्क व पार्किंग शुल्क देना होता है। जिसकी वसूली अभी बागदरा पंचायत कर रही है। उल्लेखनीय है कि महू-मंडलेश्वर मार्ग पर स्थित ऐतिहासिक जाम गेट अहिल्याकालीन है। इसका निर्माण महेश्वर की महारानी अहिल्याबाई होलकर ने आराम व सुरक्षा की दृष्टि से करवाया था। वो इस रास्ते से होकर इंदौर जाती थीं। उस समय यह रास्ता राज मार्ग हुआ करता था महेश्वर से रामकुंड, खारिया, बाराद्वारी, ठनगांव, चोली और जाम दरवाजा होते हुए मालवा में प्रवेश करता था, जो बड़गोंदा से महू होकर इंदौर पहुंचता था। ऊंचाई पर होने के कारण यहां हिल स्टेशन सा अनुभव प्राप्त होता है। हजारों लोग इस जगह को निहारने आते हैं।

संभागायुक्त के निर्देश पर इंदौर और खरगोन जिले के अधिकारियों ने बीते दिनों जाम दरवाजे का सीमांकन किया था, जिसमें यह ऐतिहासिक इमारत को खरगोन जिले की राजस्व सीमा में होना पाया गया है। इसकी पूरी रिपोर्ट संभागायुक्त कार्यालय भेज दी गई है। - ओमनारायणसिंह बड़कुल, एसडीएम, मंडलेश्वर