कारगिल विजय दिवस : बलिदान को बनाया संकल्प, अब सैकड़ों वीर परिवारों का सहारा हैं प्रतिभा यादव
कारगिल युद्ध में मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले खरगोन जिले के ग्राम घुघरियाखेड़ी निवासी लांस नायक बलिदानी राजेंद्र यादव (सेना मे...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 26 Jul 2026 09:41:08 AM (IST)Updated Date: Sun, 26 Jul 2026 09:41:08 AM (IST)
बलिदानी पति की प्रतिमा पर श्रद्धा सुमन अर्पित करतीं प्रतिभा यादव। (नईदुनिया प्रतिनिधि)HighLights
- पति के बलिदान के समय तीन माह की गर्भवती थीं
- आज शहीद समरसता मिशन की प्रदेश संरक्षक बनकर वीर परिवारों को दे रहीं संबल
- बेटी मेघा भी सेना में जाकर पिता की विरासत आगे बढ़ाना चाहती है
मनोज भटोरे, नईदुनिया, खरगोन : कारगिल युद्ध में मातृभूमि की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान देने वाले खरगोन जिले के ग्राम घुघरियाखेड़ी निवासी लांस नायक बलिदानी राजेंद्र यादव (सेना मेडल) की वीरता आज भी निमाड़ की मिट्टी में गूंजती है। 30 मई 1999 को तोलोलिंग की 15 हजार फीट ऊंची पोस्ट पर दुश्मन से लड़ते हुए उन्होंने प्राण न्योछावर कर दिए। उस समय उनकी पत्नी प्रतिभा यादव तीन माह की गर्भवती थीं।
पति के बलिदान के बाद आई असहनीय पीड़ा को प्रतिभा यादव ने अपनी ताकत बनाया। उन्होंने बेटी मेघा का पालन-पोषण करते हुए उसे शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाया। इतना ही नहीं, उन्होंने अपने जीवन का उद्देश्य अन्य बलिदानी परिवारों की सेवा को बना लिया। आज वे शहीद समरसता मिशन की प्रदेश संरक्षक के रूप में प्रदेशभर के वीर परिवारों की समस्याओं के समाधान और उन्हें सामाजिक संबल दिलाने के लिए सक्रिय हैं।
उज्जैन के बलिदानी परिवार के लिए जुटाए 21 लाख रुपये
शहीद समरसता मिशन के माध्यम से प्रतिभा यादव ने उज्जैन के अमर बलिदानी गजेंद्र राव सुर्वे के आर्थिक संकट से जूझ रहे माता-पिता की सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 23 जनवरी 2023 को आयोजित शौर्यांजलि कार्यक्रम के जरिए सामाजिक सहयोग से 21 लाख रुपये जुटाए गए। इसके बाद 13 अगस्त 2025 को सुर्वे परिवार को 'राष्ट्र शक्ति मंदिर' के रूप में सर्वसुविधायुक्त आवास समर्पित किया गया।
15 राज्यों में सक्रिय, सैकड़ों परिवारों तक पहुंचा मिशन
प्रतिभा यादव बताती हैं कि शहीद समरसता मिशन वर्तमान में देश के 15 राज्यों में सक्रिय है। मिशन अब तक चार राष्ट्र शक्ति मंदिर और 20 से अधिक राष्ट्र शक्ति स्थलों का निर्माण करा चुका है। इसके अलावा 300 से अधिक शहीद परिवारों का नागरिक अभिनंदन, 2,121 युवा समरसता संवाद और 48 युवा समरसता समागम आयोजित किए जा चुके हैं। मिशन वीर नारियों को शिक्षा, स्वरोजगार और सामाजिक सशक्तिकरण से जोड़ने की दिशा में भी कार्य कर रहा है।
बेटी मेघा का सपना- पिता की तरह पहनना सेना की वर्दी
शहीद राजेंद्र यादव की बेटी मेघा ने पिता को कभी नहीं देखा, लेकिन उनकी वीरता की कहानियां सुनकर बड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने पिता के सम्मान में गांव के स्कूल का नाम शहीद राजेंद्र यादव के नाम पर रखने की मुहिम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्तमान में दिल्ली में अध्ययनरत मेघा का लक्ष्य भारतीय सेना में भर्ती होकर अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाना है।
पति की शहादत मेरे जीवन का सबसे बड़ा दुख है
पति की शहादत मेरे जीवन का सबसे बड़ा दुख है, लेकिन उसी ने मुझे यह संकल्प भी दिया कि कोई भी वीर परिवार खुद को अकेला महसूस न करे। - प्रतिभा यादव, प्रदेश संरक्षक, शहीद समरसता मिशन