*व्यवस्था पर सवाल : वाहन चालक बन गए ठेकेदार, किारोर-किशोरियां खेतों में कर रहे मजदूरी

खरगोन (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिले के आदिवासी क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर किशोर और किशोरियां मजदूरी के लिए बाहर जाने को विवश हैं। इन्हें गांव से संबंधित स्थान तक लाने और ले जाने का काम वाहनों से किया जाता है। अधिकांश वाहनों के चालक ही ठेकेदार की भूमिका में होते हैं। जहां भी मजदूरों की आवश्यकता होती है, संबंधित व्यक्ति वाहन चालक से संपर्क करता है। संबंधित वाहन चालक ही उन्हें गांव से लेकर मौके पर पहुंचता है। प्रत्येक मजदूर को 150 से 200 रुपये मजदूरी मिलती है।

उल्लेखनीय है कि खंडवा-खरगोन मार्ग पर ग्राम बिलाली और बेहरामपुर टेमा की बीच गुरुवार को मजदूरों से भरी पिकअप पलटने से 13 वर्षीय किशोरी की मौत हो गई। वहीं दो नाबालिग मजदूर गंभीर रूप से घायल हैं। हादसे में कुल 20 मजदूर घायल हुए हैं। इनमें से 16 मजदूर नाबालिग हैं। ये सभी मजदूर ग्राम रेटवा के निवासी थे। वे मजदूरी के लिए बेहरामपुरा टेमा के आसपास जा रहे थे। ऐसे हादसे उन सरकारी घोषणाओं की पोल खोलते हैं, जिनमें क्षेत्र में पर्याप्त मजदूरी उपलब्ध कराने और बाल श्रम पर रोक लगाने के दावे किए जाते हैं। जब कोई बड़ी दुर्घटना हो जाती है, तब व्यवस्था के जिम्मेदार सख्ती बरतने का फिर भरोसा दिलाते हैं, परंतु कुछ समय बाद सब कुछ पहले जैसा हो जाता है।

बकरी को बचाने में पलटा वाहन

घटना के बाद घायलों को 108 एबुंलेंस, डायल 100 और अन्य वाहनों से उपचार के लिए जिला अस्पताल लाया गया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही 13 वर्षीय निरमा पिता छगन की मौत हो गई। वहीं हादसे में सावन पिता गोरेलाल सहित एक अन्य मजदूर की हालत गंभीर है। उनका इलाज चल रहा है। घायलों ने बताया कि यह घटना करीब 9 बजे की है। वे पिकअप वाहन में सवार होकर मजदूर मजदूरी करने के लिए रेटवा से ग्राम बेहरामपुरा टेमा जा रहे थे। बेहरामपुर फाटे के पास अचानक वाहन के सामने बकरी आने से वाहन असंतुलित होकर पलट गया। घटना के बाद घायलों की आवाज सुनकर खेतों में काम कर रहे किसान एकत्र हो गए। मार्ग से गुजर रहे वाहन चालकों ने भी घटना स्थल पर रुककर घायलों की मदद की। उन्हें उपचार के लिए जिला अस्पताल भेजा। घटना की सूचना मिलते ही घायलों के स्वजन भी मौके पर पहुंचे। यहां से वे जिला अस्पताल भी पहुंचे। गोगावां पुलिस ने तत्काल मौके पर पहुंचकर वाहन को मार्ग से हटावाया और अवागमन सुचारु करवाया। पुलिस ने वाहन जब्त कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

दुर्घटना में ये हुए घायल

इस दुर्घटना में ममता पिता लाड़का (14), सावन पिता गोरेलाल (16), बिशन पिता अमरसिंह (13), झबरसिंह पिता राजाराम (15), भीमसिंह पिता चमार (20), मेडली बाई पिता कालू (50), कृष्णकांत पिता लालसिंह (18), रेखा पिता कनसिंह (17), अनिता पिता गमेसिंह (16), चंदा पिता मोहन (14), संतोषी पिता दिनेश (13), लक्ष्‌मी (18), प्रमिला पिता नरसिंह (16), सोनू पिता बाबू (15), संगीता पिता शंकर (15), आरती पिता मोहन (16), रिंकू पिता गोरेलाल (17), रेखा पिता दशरथ (16), निर्मला पिता लक्ष्‌मण (16) और सीता पिता कमलसिंह (14) घायल हुए हैं। जिला अस्पताल में मौजूद किशोर और किशोरियों के स्वजन ने बताया कि अब वे बच्चों को इस प्रकार की मजदूरी करने के लिए नहीं पहुंचाएंगे।

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दो वर्ष में रेस्क्यू कर छुड़वाए 100 से अधिक नाबालिग मजदूर

जिले के आदिवासी क्षेत्रों में वर्ष 2019 और 2020 में चाइल्ड लाइन ने खेतों में काम करने के लिए जा रहे 100 से अधिक नाबालिग मजदूरों को मुक्त कराया था। इस कार्रवाई के दौरान पांच वाहन मालिकों के खिलाफ पुलिस ने प्रकरण भी दर्ज किया था। पुलिस के अनुसार ऐसे हादसों के लिए वाहन चालकों द्वारा श्रमिक ठेकेदार के रूप में खेत मालिकों से बाल श्रमिकों के कार्य के बदले रुपये प्राप्त करना और वाहन लोडिंग वाहन से उन्हें असुरक्षित परिवहन करने को जिम्मेदार माना है। इस साक्ष्‌य के आधार पर उनके खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम 2015 और बालश्रम प्रतिषेध अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था।

Posted By: Nai Dunia News Network

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