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देवी अहिल्याबाई के जीवन और विरासत पर शोध को मिलेगा नया आयाम, होलकर कल्चरल सेंटर और FIHCR के बीच हुआ एमओयू

लोकमाता पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर के जीवन, नेतृत्व और ऐतिहासिक विरासत को प्रमाणिक स्रोतों के आधार पर नई पीढ़ी और दुनिया के सामने लाने की दिशा में मं...और पढ़ें

By Vivek ParasharEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Tue, 29 Sep 2026 07:05:56 PM (IST)Updated Date: Tue, 29 Sep 2026 07:05:56 PM (IST)
देवी अहिल्याबाई के जीवन और विरासत पर शोध को मिलेगा नया आयाम, होलकर कल्चरल सेंटर और FIHCR के बीच हुआ एमओयू
होलकर कल्चरल सेंटर और FIHCR के बीच हुआ एमओयू। -नईदुनिया

HighLights

  1. अहिल्या फोर्ट में एमओयू पर हुए हस्ताक्षर
  2. ऐतिहासिक दस्तावेजों और अभिलेखीय स्रोतों के अध्ययन में मिलेगा सहयोग
  3. अहिल्याबाई के जीवन और नेतृत्व पर शोधपरक पुस्तक तैयार की जा रही है

नईदुनिया प्रतिनिधि, महेश्वर (खरगोन) : लोकमाता पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर के जीवन, नेतृत्व और ऐतिहासिक विरासत को प्रमाणिक स्रोतों के आधार पर नई पीढ़ी और दुनिया के सामने लाने की दिशा में मंगलवार को शाम 5:30 महेश्वर में महत्वपूर्ण पहल हुई।

अहिल्या फोर्ट में होलकर कल्चरल सेंटर (HCC) और फाउंडेशन फॉर इंडियन हिस्टॉरिकल एंड कल्चरल रिसर्च (FIHCR) के बीच समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। कार्यक्रम में होलकर कल्चरल सेंटर के संस्थापक-संरक्षक प्रिंस यशवंतराव होलकर और FIHCR के संस्थापक-निदेशक इतिहासकार डॉ. विक्रम सम्पत मौजूद रहे।


शोधपरक अध्ययन को बढ़ावा देना है

MoU का उद्देश्य अहिल्याबाई होलकर के जीवन, प्रशासनिक नेतृत्व, कार्यशैली और विरासत से जुड़े ऐतिहासिक दस्तावेजों, अभिलेखीय सामग्री तथा अन्य स्रोतों के शोधपरक अध्ययन को बढ़ावा देना है। FIHCR द्वारा मध्यप्रदेश संस्कृति संचालनालय के सहयोग से अहिल्याबाई के जीवन और नेतृत्व पर शोधपरक पुस्तक तैयार की जा रही है। इस सहयोग से होलकर परंपरा से जुड़े दस्तावेजों और उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोतों के अध्ययन में सहायता मिलने की उम्मीद है।

युवाओं के लिए इतिहास को जीवंत बनाना जरूरी

प्रिंस यशवंतराव होलकर ने कहा कि मां साहब अहिल्याबाई होलकर के जीवन पर अब तक काफी इतिहास लिखा जा चुका है, लेकिन आज की पीढ़ी और विशेषकर युवाओं के लिए इस इतिहास को जीवंत बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुस्तक और शोध का उद्देश्य केवल पुराने इतिहास को दोहराना नहीं, बल्कि शोध के माध्यम से मां साहब के जीवन, विचारों और कार्यों को नए स्वरूप में दुनिया के सामने लाना है।

शोध एक प्रमाणिक और सुंदर दस्तावेज के रूप में सामने आएगा

उन्होंने कहा कि FIHCR की टीम और होलकर कल्चरल सेंटर के सहयोग से होने वाला यह शोध एक प्रमाणिक और सुंदर दस्तावेज के रूप में सामने आएगा। महेश्वर स्वयं मां साहब के जीवन और कार्यों का जीवंत प्रमाण है। यहां उनके शासन, समाजसेवा, संस्कृति और लोककल्याण की दृष्टि को करीब से समझा जा सकता है। शोध और दस्तावेजीकरण के माध्यम से महेश्वर से जुड़े इस इतिहास को व्यापक वैश्विक संदर्भ में सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।

शोध को मिलेगा व्यापक आधार

FIHCR के संस्थापक-निदेशक डॉ. विक्रम सम्पत के नेतृत्व में शोध परियोजना संचालित हो रही है। FIHCR की प्रोग्राम मैनेजर रसिका भाले शोध प्रक्रिया में भूमिका निभा रही हैं। MoU के माध्यम से दोनों संस्थाओं के बीच ऐतिहासिक सामग्री और शोध संसाधनों के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। इससे अहिल्याबाई के शासन, नेतृत्व और विरासत से जुड़े स्रोतों के व्यवस्थित अध्ययन की संभावनाएं बढ़ेंगी।

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