शराब के नशे में स्कूल पहुंचे टीचर, बोले- 'मैं अपने बेटे को भी नहीं छोड़ता'; यह सुनते ही क्लास से भाग गए बच्चे
खरगोन जिले के डोंगर चीचली गांव में शिक्षक केशव शारदे ने क्लास में जाकर बच्चों को धमकाया था और कहा था कि 'मैं मेरे बेटे को भी नहीं छोड़ता, मैं छुट्टी प ...और पढ़ें
Publish Date: Sun, 11 Jan 2026 12:14:50 PM (IST)Updated Date: Sun, 11 Jan 2026 12:24:10 PM (IST)
शराब पीकर स्कूल पहुंचे टीचर का वीडियो सोशल मीडिया पर हुआ था वायरल।HighLights
- कलेक्टर भव्या मित्तल ने टीचर को किया निलंबित
- अन्य अधिकारियों को जारी किया गया नोटिस
- सीनियर्स को नहीं दी थी इस घटना की जानकारी
नईदुनिया प्रतिनिधि, खरगोन। खरगोन जिले के डोंगर चीचली गांव में माध्यमिक शिक्षक के शराब पीकर स्कूल में जाकर बच्चों को धमकाने और उनके घबराकर स्कूल छोड़कर भागने के मामले में जिला कलेक्टर भव्या मित्तल के निर्देश पर कार्रवाई की गई है। जहां संबंधित शिक्षक को निलंबित कर दिया गया है, वहीं इस मामले को वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में नहीं लाने पर चार अधिकारियों को शोकाज नोटिस दिया।
घटना के मुताबिक 6 जनवरी को केशव शारदे शराब पीकर स्कूल में आए और उनकी हरसकतों से बच्चें घबराकर समय के पहले ही क्लास से बाहर निकल भागे। उल्लेखनीय है कि शिक्षक केशव शारदे ने क्लास में जाकर बच्चों को धमकाया था और कहा था कि 'मैं मेरे बेटे को भी नहीं छोड़ता, मैं छुट्टी पर हूं मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है, हेड मास्टर दारू पीते हैं यह किसने बताया है।'
जब बच्चे घबरा कर भागने लगे तो केशव शारदे उनके पीछे गए और कहा कि अभी चार ही बजे हैं, फिलहाल छुट्टी नहीं हुई है। घटना का वीडियो सामने आने पर जिला कलेक्टर भव्या मित्तल ने जांच कर प्रतिवेदन सौंपने के निर्देश दिए थे। ग्रामीण और पंचायत प्रतिनिधियों ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा भी बनाया था।
टीचर को किया निलंबित
सहायक आयुक्त आदिवासी विकास खरगोन इकबाल हुसैन आदिल ने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर शासकीय एकीकृत माध्यमिक विद्यालय डोंगर चीचली के प्रधान पाठक केशव शारदे को जिला कलेक्टर भव्या मित्तल ने शुक्रवार को निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही इस मामले में लापरवाही बरतने पर जन शिक्षक शैलेश वर्मा, ब्लाक रिसोर्स कोआर्डिनेटर (बीआरसी) रंजीत आर्य, ब्लाक एजुकेशन ऑफिसर विष्णु पाटीदार और संकुल प्राचार्य लोकेंद्र सिंह तोमर को शोकाज नोटिस जारी किया गया है। उनके द्वारा समय रहते प्रकरण को वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में नहीं लाया गया।