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विश्व पर्यटन दिवस : महेश्वर में अहिल्या लोक से बदलेगी तस्वीर, खुलेंगे रोजगार के नए द्वार

नर्मदा तट पर बसा यह नगर केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि जीवंत इतिहास है। जहां घाटों पर आस्था बहती है, किले की दीवारों में अहिल्याबाई होलकर का युग बोलत...और पढ़ें

By Manoj BhatoreEdited By: Ramnath Mutkule
Publish Date: Sat, 26 Sep 2026 05:30:30 PM (IST)Updated Date: Sat, 26 Sep 2026 05:33:49 PM (IST)
विश्व पर्यटन दिवस : महेश्वर में अहिल्या लोक से बदलेगी तस्वीर, खुलेंगे रोजगार के नए द्वार
निर्माणाधीन अहिल्या लोक की काल्पनिक संरचना। (प्रतीकात्मक तस्वीर)

HighLights

  1. अहिल्याबाई की विरासत को एक छतरी के नीचे लाने की तैयारी
  2. सिंहस्थ 2028 से पूर्व पर्यटन को नई उड़ान मिलने की उम्मीद
  3. आधुनिक तकनीक से जीवंत होगा इतिहास

नरेंद्र चौधरी, नईदुनिया, महेश्वर : नर्मदा तट पर बसा यह नगर केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि जीवंत इतिहास है। जहां घाटों पर आस्था बहती है, किले की दीवारों में अहिल्याबाई होलकर का युग बोलता है और करघों पर चलती महेश्वरी साड़ी सदियों पुरानी परंपरा को जीवित रखती है।

अब इसी विरासत को आधुनिक पर्यटन से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। अहिल्या लोक परियोजना नगर के पर्यटन भविष्य का नया अध्याय बनने जा रही है, जो इतिहास दर्शाने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और कारोबार के नए अवसर खोलेगी।


प्रस्तावित अहिल्या लोक में पर्यटक रानी अहिल्याबाई के जीवन, उनके प्रशासन, लोक कल्याण व नगर की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक से जान सकेंगे। परियोजना की रूपरेखा में आर्टिफैक्ट गैलरी, वीआर पाड गैलरी, युद्ध दृश्य गैलरी, ग्रामीण जीवन के डायोरामा, बुनाई सेटअप, महिला गैलरी व दुर्गा दल वाहिनी गैलरी प्रस्तावित हैं। प्रथम तल पर राजवाड़ा गैलरी, सेवन डी इमर्सिव गैलरी, संस्कृति कल्पवृक्ष, खासगी का धन गैलरी व 180 सीट का सभागार प्रस्तावित है।

करघे की खनक से बाजार तक पहुंचेगा पर्यटन

नगर की पहचान महेश्वरी साड़ी के बिना अधूरी है। अहिल्या लोक योजना में बुनाई सेटअप व स्मारिका दुकानों का प्रविधान इस पारंपरिक कला को पर्यटन बाजार से जोड़ेगा। समीपस्थ ग्राम केरियाखेड़ी में पांच करोड़ 11 लाख रुपये की स्वीकृत लागत से प्रस्तावित टेक्सटाइल टूरिज्म विलेज इस कड़ी को और मजबूत करेगा। यहां पर्यटक बुनाई कला को करीब से देख सकेंगे और बुनकरों को सीधा बाजार मिलेगा। इससे होटल, होम-स्टे, वाहन, नाव, गाइड व हस्तशिल्प से जुड़े कारोबारों को भी लाभ मिलेगा।

उज्जैन-ओंकारेश्वर-महेश्वर-मांडू से बनेगा बड़ा पर्यटन परिपथ

प्रदेश में उज्जैन, ओंकारेश्वर, महेश्वर व मांडू को जोड़ने वाली पर्यटन कड़ी विशेष महत्व रखती है। महाकाल व सिंहस्थ, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, नर्मदा किनारे महेश्वर और मांडू की ऐतिहासिक विरासत पर्यटकों के लिए विविध अनुभवों वाला मार्ग बनेगी। नर्मदा एक्सप्रेसवे जैसी कनेक्टिविटी परियोजनाओं से क्षेत्र की पहुँच सुगम होने की उम्मीद है। सहस्त्रधारा प्रकृति व नर्मदा के अद्भुत मेल का क्षेत्र है, जिसे मुख्य पर्यटन मार्ग से प्रभावी रूप से जोड़ने की आवश्यकता है।

इसी प्रकार नर्मदा के मध्य स्थित बाणेश्वर महादेव मंदिर में सुरक्षित पहुंच, स्वच्छता व प्रकाश व्यवस्था विकसित करने से पर्यटकों को नया अनुभव मिलेगा। नगर के पर्यटन की आत्मा नर्मदा है। अतः नर्मदा स्वच्छता व पर्यावरण संरक्षण प्राथमिक शर्त है। प्रदूषण रहित व ध्वनि रहित इंजन वाली नावों के संचालन से नर्मदा की शांति व प्राकृतिक वातावरण सुरक्षित रहेगा।

नियमित समीक्षा कर रहे

आगामी सिंहस्थ महाकुंभ को देखते हुए यह अति महत्वपूर्ण परियोजना है। निर्माण कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण हो, इसके लिए नियमित समीक्षा की जा रही है। - पूर्वा मंडलोई, एसडीएम, महेश्वर

चरणबद्ध तरीके से कार्य चल रहा

परियोजना चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ रही है। ज्वालेश्वर व कालेश्वर महादेव को जोड़ने के लिए झूला पुल व नया पहुंच मार्ग भी परियोजना का हिस्सा है, जिससे श्रद्धालुओं को सुगमता होगी। - निलेश शेंगले, कार्यपालन यंत्री

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