
नईदुनिया प्रतिनिधि, मंदसौर। दो दिन पहले पानी के टैंक में मिली मासूम की लाश की कहानी इतनी दर्दनाक निकलेगी इसकी दोनों ही परिवारों ने कल्पना भी नहीं की होगी। पड़ोस में ही रहने वाली 12 वर्षीय बालिका ने 4 वर्षीय मासूम की महज इसलिए अपने घर के होद में डुबोकर हत्या कर दी थी कि एक दिन पहले बालिका ने बालक से चॉकलेट लेकर खा ली थी तो बालक की मां ने उसे डांट दिया था। पुलिस ने बालिका के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज कर अभिरक्षा में लिया। न्यायालय ने उसे बालिका सुधार गृह विदिशा भेज दिया है।
पड़ोसियों के बीच सामान्य व्यवहार में एक डांट किसी परिवार को इतनी महंगी पड़ जाएगी यह किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी। शामगढ़ में पानी-पूरी का ठेला लगाने वाले रामकेश बघेल यहीं पंजाबी कॉलोनी में रहते हैं। उनके परिवार में पत्नी, तीन बेटी व चार साल का मासूम कृष्णपाल उर्फ बाबू भी है।
लगभग 10-12 दिन पहले बाबू चॉकलेट खा रहा था, इसी दौरान पड़ोस में रहने वाली 12 वर्षीय बालिका आई और उसने बाबू से चॉकलेट लेकर खा ली। तब बाबू की मां ने बालिका को डांट दिया था।
यही बात बालिका के मन में घर कर गई और उसने मन ही मन बदला लेने की ठान ली। 24 अक्टूबर को दोपहर दो बजे बालिका ने चॉकलेट देने के बहाने बाबू को अपने घर बुलाया। इसके बाद अपने घर में स्थित पानी के भूमिगत होद के ऊपर से पट्टी हटाकर मासूम को धक्का दे दिया और फिर से पट्टी ऊपर रख दी। अंदर तड़प-तड़प कर मासूम की मौत हो गई। इधर काफी देर तक बाबू नहीं दिखा तो उसके स्वजन खोजने निकले। पुलिसकर्मी भी आए और शामगढ़ में आस-पास कई जगह पर खोजकर आ गए।
शामगढ़ थाना प्रभारी कपिल सौराष्ट्रीय ने बताया कि सभी तरफ खोजने के बाद हमने कॉलोनी में ही हर घर में जांच की। वहां पानी के भूमिगत होद भी देखे, तो बालक का शव पड़ोसी के होद में मिला। बाबू को भी आखिरी बार इसी घर में रहने वाली लड़की के साथ देखा गया था। इसके बाद पुलिस ने शव को बाहर निकलवाकर पीएम के बाद स्वजन को सौंप दिया। स्वजन उसका शव लेकर अंतिम संस्कार करने अपने पैतृक ग्राम चले गए।
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इधर पुलिस ने पूरे मामले का पता लगाने के लिए मनोवैज्ञानिक तरीके से बालिका से पूछताछ की। उसने जो कहानी बताई तो एक बार तो पुलिस अधिकारियों को भी यकीन नहीं हुआ कि 12 वर्षीय बालिका इस तरह बदले की भावना से हत्या कर सकती है। मंगलवार को बालिका को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से बालिका सुधार गृह विदिशा भेज दिया गया।
रामकेश बघेल उप्र के रहने वाले हैं और वर्षों से शामगढ़ में पानी-पूरी का ठेला लगा रहे हैं। यहीं पंजाबी कॉलोनी में घर बना लिया है, अब यहीं बस गए हैं। उनके यहां तीन बालिकाओं के बाद बाबू का जन्म हुआ था। घर में इकलौता भाई होने से सभी का लाड़ला था। महज एक चॉकलेट को लेकर पड़ोस की 12 वर्षीय बालिका ने जो किया इस दर्द को पीड़ित परिवार कभी भूल नहीं पाएगा।