
नईदुनिया प्रतिनिधि, मंदसौर। ग्राम नैनोरा के मोहनलाल रेगर भारतीय सेना में हैं। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में तैनात हैं। यहां गांव में उनकी पत्नी व बच्चे अपनी ही जमीन पर बोवनी के लिये परेशान हाे रहे हैं। फौजी एवं उनकी पत्नी ने आरोप लगाया है कि गांव के ही कुछ लोग बेवजह विवाद कर रहे हैं, जबकि खेत उनका हैं, न्यायालय से केस भी जीत चुके हैं, पुलिस अधिकारियों के सामने राजीनामा भी हुआ था, बावजूद खेत पर बोवनी नहीं करने दी जा रही हैं, जबकि पूरे गांव में सभी किसानों के खेतों में बोवनी हो चुकी हैं।
अपने ही खेत पर बोवनी के लिये परेशान हो रहे फौजी मोहनलाल रेगर की पत्नी द्वारा 16 जून को जनसुनवाई में पुलिस अधीक्षक के नाम आवेदन सौंपकर बोवनी के लिये पुलिस सुरक्षा की मांग की थी। फौजी मोहनलाल रेगर ने बताया की अब तक पुलिस सुरक्षा नहीं मिली हैं। गांव के ही जो लोग बेवजह विवाद करते हैं और हमें हमारी जमीन पर बोवनी नहीं करने देते हैं उनसे हमारा कोई विवाद नहीं हैं फिर भी मेरे परिवार को परेशान किया जा रहा हैं।
16 जून पुलिस अधीक्षक को जनसुनवाई में सौंपे आवेदन में फौजी मोहनलाल रेगर की पत्नी निर्मलाबाई ने बताया था की मेरे पति भारतीय सेना फौज में देश की सेवा में तैनात हैं और अक्सर डयूटी पर बाहर रहते हैं। पति के बाहर होने के कारण मैं गांव में अपने बच्चों और परिवार के साथ अकेली रहती हूं तथा खेती व मजदूरी कर जीवन यापन करती हूं। ग्राम नेनौरा में मेरे नाम पर कृषि भूमि स्थित हैं, जिसका खसरा नंबर 49/4 बराबर 50, 54/1 बराबर 60, 57/2/2 बराबर 13 हैं। इसका कुल रकबा 123 आरी (पांच बीघा) तथा 6 आरी अतिक्रमण की जमीन हैं।
इस भूमि पर मैं पिछले 25 वर्षो से मालिकाना हक के साथ स्वयं खेती करती आ रही हूं। उक्त भूमि की रजिस्ट्री पावती व नामांतरण मेरे नाम पर दर्ज हैं। नारायणगढ़ कोर्ट से केस जीतकर मुझे इसका कानूनी कब्जा मिला हैं। पुलिस, प्रशासन, गिरदावर, आरआई, नायाब नाजिर और पटवारी द्वारा बकायदा सीमांकन (नपती) कर जेसीबी से खाई भी खुदवाई गई थी, जो प्रशासनिक रिकार्ड में दर्ज हैं। 18 नवंबर 2025 को एसडीओपी व टीआई सा. की उपस्थिति में राजीनामा भी हुआ था। उसके बावजूद गांव के ही कुछ लाेग बेवजह हमने विवाद कर रहे हैं, रास्ता रोकते हैं। इनकी वजह से अब तक खेत में बोवनी नहीं कर पा रहे हैं। मांग की गई थी की बोवनी के लिये पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाये। लेकिन अब तक पुलिस सुरक्षा नहीं मिली हैं। अब तक फौजी का परिवार अपने खेत में बोवनी नहीं कर पाया हैं।