
नईदुनिया प्रतिनिधि, मंदसौर। मंदसौर शहर के लगभग सभी क्षेत्रों सहित जिलेभर में श्वानों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं। जिले में दो मासूम बच्चों की जान भी श्वानों के हमले जा चुकी हैं, बावजूद हमारे जिम्मेदार श्वानों के हमलों को रोक नहीं पा रहे हैं।
जिला अस्पताल की ओपीडी में हर दिन औसतन 25 लोग श्वानों के हमले से घायल होेकर उपचार के लिये पहुंच रहे हैं। जबकि जिलेभर में हर दिन 50 से ज्यादा लोगों को श्वान काट रहे हैं। श्वानों की नसबंदी और डाग शेल्टर होम को लेकर अब तक बाते ही अधिक हुई हैं। अभी तक प्रक्रिया पूरी नहीं हुई हैं। चिकित्सकों के अनुसार सितंबर से जनवरी माह तक श्वानों के हमले बढ़ जाते हैं, ऐसे में कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में श्वानों के हमले से घायलों की संख्या भी बढ़ेगी।
श्वानों के काटने से बड़ी घटना होने के बाद जिलेभर में अधिकारियों ने बहुत कुछ करने का दिखावा किया जाता हैं। लेकिन धरातल पर श्वानों से आमजन के बचाव के लिये कुछ नहीं हुआ है। धारा 144 भी लागू हुई लेकिन श्वानों के हमले कम नहीं हुए। नगरपालिका ने भी श्वानों को पकड़ने की कुछ कोशिश की लेकिन कभी श्वान प्रेमी तो कभी अन्य अड़चनों के चलते सड़कों पर लोगों पर हमला कर रहे श्वानों से नागरिकों को राहत नहीं मिली।
वर्तमान में मंदसौर शहर की लगभग हर गली-मोहल्लों में श्वानों के झुंड डर का कारण बने हुए है। बच्चों को घरों के बाहर खेलने में डर लग रहा है। बड़े भी परेशान है। मंदसौर शहर में श्वानों के आतंक को इसी से समझा जा सकता है की दो साल पहले जनकुपुरा राम मोहल्ला क्षेत्र के रहवासियों ने कोतवाली थाने पहुंचकर श्वानों को पकड़ने की गुहार लगाई थी। दशरथ नगर के श्वानों की समस्या को लेकर कोतवाली थाने पहुंचे थे।
नगरपालिका श्वानों को पकड़ने की सिर्फ योजना ही बना रही हैं। कभी पशु प्रेमी तो कभी नपा में इच्छा शक्ति के अभाव के कारण शहर श्वानों के आतंक से मुक्त नहीं हो पा रहा है। पूरे शहर में 3000 से अधिक श्वान है जो मुख्य मार्गों, चौराहों से लेकर कालोनियों की गलियों में दौड़ रहे हैं।
रात के समय में श्वान अधिक परेशानी का कारण बनते हैं। सड़कों पर दौड़ रहे श्वान लोगों को शिकार बना रहे है। पहले नृसिंहपुरा, जनकूपुरा, मदारपुरा, बालागंज, नयापुरा, खानपुरा, रेवासदेवड़ा मार्ग, अभिनंदन क्षेत्र जैसे इलाकों में ही श्वानों के झुंड नजर आते थे, लेकिन अब तक शहर के मुख्य मार्ग हो गया नई कालोनियों सभी दूर श्वानों के झुंड राहगीरों के साथ रहवासियों के लिए खतरा बने हुए है। श्वानों को पकड़ने के लिये लोग सीएम हेल्प लाइन पर भी शिकायत कर रहे है।
शहर की कुछ कालोनियों, मोहल्लों, गलियों में आवारा श्वानों की समस्या ज्यादा है। यहा आए दिन गली मोहल्लों से लेकर कालोनी में आवाजाही करने वाले लोगों को यह श्वान अपना शिकार बना रहे हैं। बच्चों के साथ ही बड़े भी इनके शिकार हो रहे हैं।
यह आंकड़े जिला अस्पताल के अनुसार हैं।
शहरवासी जहां आवारा श्वान की समस्या से परेशान हैं। समूह में घुम रहे श्वान के कारण सडकों पर यातायात तो बाधित होता ही है। रहवासी क्षेत्रो में यह भय का कारण बन रहे हैं। बच्चों के लिए कालोनियों में घरों के बाहर खेलना भी दुभर हो रहा हैं। सीएम हेल्पलाइन तक शिकायतें हो रही है। नपा पकड़ने के लिए मुहिम भी चलाती है तो शहर में श्वान प्रेमी नपा अमले की परेशानियों को आए दिन बढ़ा रहे हैं। जब भी नपा कार्रवाई करती है तो श्वान प्रेमी नपा की कार्रवाई को पशु क्रूरता वाली बताकर हर स्तर पर शिकायत कर रहे हैं। इसी कारण कार्रवाई करने में भी नपा को दिक्कत आ रही है।
चिकित्सकों के अनुसार श्वान की लार में रैबीज नामक वायरस होता है। श्वान के दांत लगने से यह वायरस शरीर में प्रवेश कर जाता है। शरीर पर इससे होने वाले दुष्प्रभाव का असर तत्काल दिखाई देने लगे, यह जरूरी नहीं। इलाज नहीं कराने पर 20 साल में कभी भी वायरस सक्रिय हो सकता है। रैबीज वायरस के कारण मरीज हाइड्रोफोबिया हो जाता है। इसमें याददाश्त खोना, पानी से डरना, लोगों को काटना, इधर-उधर भागना जैसी हरकतें मरीज करते हैं। श्वान के काटने से मौत भी हो सकती है। चिकित्सकों का कहना है कि श्वान के काटने के मामलों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।
सुवासरा में चार जून 2025 को चार वर्षीय मासूम आयुष पुत्र दशरथदास बैरागी पर श्वानों के झुंड ने हमला कर दिया था। श्वानों ने मासूम को इस तरह काटा की अस्पताल पहुंचने से ही मौत हो गई। इससे पहले 12 मार्च 2024 को भानपुरा से लगभग ढाई किमी दूर गरोठ रोड पर श्वानों झुंड ने 11 साल की तनीषा पुत्री लोकेशनाथ बैरागी निवासी लोटखेड़ी पर हमला कर उसे लहूलुहान कर दिया था। स्वजन उसे लेकर अस्पताल पहुंचे जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
शहर में श्वानों को पकड़ने की कार्रवाई की जाती हैं। शिकायतें भी पहुंच आ रही हैं। अलावदाखेड़ी रोड पर कांजी हाउस के समीप शेल्टर होम बनाया जाएगा, इसके लिये टेंडर प्रक्रिया चल रही हैं। -हेमचंद शर्मा, स्वास्थ्य अधिकारी, नपा मंदसौर
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