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MP के मंदसौर में फसल बीमा की राशि तो कटी, लेकिन मुआवजे ने उम्मीदों को तोड़ा; किसान हुए नाराज

PM Fasal Bima Yojana : मंदसौर में खरीफ 2025 की फसल बीमा राशि जारी होने के बाद किसान नाराज हैं। अतिवृष्टि और बीमारी से सोयाबीन में शत-प्रतिशत नुकसान के...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Prashant Pandey
Publish Date: Fri, 07 Aug 2026 12:00:05 PM (IST)Updated Date: Fri, 07 Aug 2026 12:11:38 PM (IST)
MP के मंदसौर में फसल बीमा की राशि तो कटी, लेकिन मुआवजे ने उम्मीदों को तोड़ा; किसान हुए नाराज
फसल बीमा राशि की मांग को लेकर विगत दिनों किसानों ने भानपुरा में किसानों ने धरना प्रदर्शन किया था। - फाइल फोटो

HighLights

  1. मंदसौर जिले के किसानों के अनुसार 2025 के खरीफ में सोयाबीन फसल पूरी तरह खराब हुई
  2. कई किसानों ने रोटावेटर चलाकर फसल नष्ट की, बावजूद इसके बीमा राशि पर्याप्त नहीं है
  3. नुकसान मानकर सरकार ने मुआवजा तो दिया, लेकिन बीमा की राशि ऊंट के मुंह में जीरे जैसी

नईदुनिया प्रतिनिधि, मंदसौर। खरीफ सीजन 2025 के फसल बीमा के मुआवजे के रूप में मिली राशि से किसान नाराज हैं। जिलेभर के कई क्षेत्रों में फसल बीमा रााशि को लेकर नाराजगी जताते हुए किसानों ने प्रदर्शन किया। किसानों का कहना हैं की अविवृष्टि और बीमारी ने फसलों को प्रभावित किया, बावजूद फसल बीमा उचित नहीं मिली। किसानों ने कलेक्टर से भी इस मामले में उम्मीद लगाई हैं, ताकि नुकसानी का उचित मुआवजा किसानों को मिल सके।

मंदसौर जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जारी क्लेम राशि को लेकर किसानों में असंतोष हैं। खरीफ सीजन 2025 की बीमा राशि जारी होने के बाद से ही किसानों ने नाराजगी हैं। मल्हारगढ़, भानपुरा सहित अन्य कई क्षेत्रों में किसानों ने फसल बीमा राशि को लेकर प्रदर्शन किये। भानपुरा में चार दिनों तक किसानों ने चक्काजाम किया।


प्रदर्शनों के दौरान किसानों ने आरोप लगाया कि एक ही गांव और एक जैसी फसल होने के बावजूद किसी को हजारों रुपए मिले तो किसी को नाममात्र की राशि ही प्राप्त हुई। फसल बीमा विसंगति को लेकर किसान तहसील दफ्तरों पर पहुंचकर व सीएम हेल्पलाइन पर भी शिकायते पहुंची हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार 1 लाख 38 हजार 379 किसानों को 22 करोड़ 66 लाख 97 हजार 92 रुपए की क्लेम राशि मिली हैं।

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किसानों के अनुसार वर्ष 2025 में खरीफ सीजन की सोयाबीन फसल में शत-प्रतिशत नुकसान हुआ था। कई किसानों ने अपने खेतों में रोटावेटर चला कर खराब फसल को नष्ट किया। बावजूद बीमा राशि पर्याप्त नहीं मिल रही हैं। जब आरबीसी में हुई नुकसानी को मानकर सरकार ने पिछले वर्ष किसान संगठनों एवं किसानों की मांग पर मुआवजा वितरित किया था लेकिन किसानों को फसल बीमा ऊंट के मुंह में जीरे के समान वितरित की गई। किसानों का कहना हैं की ऐसे कई गांव हैं जहां पर एक रुपया भी किसान को फसल बीमा की राशि नहीं आना सामने आ रहा हैं। हर साल प्रीमियम काटने के बाद भी बीमा क्लेम राशि नहीं दी जा रही हैं।

फसल बीमा राशि कटने के बावजूद नुकसानी का भुगतान नहीं

भानपुरा तहसील क्षेत्र के ग्राम नीमथूर, नयागांव व धनकपुरा के किसान रामेश्वर अहीर, भगवानसिंह, श्यामलाल मीणा, भैरवलाल राठौर, बाबूलाल अहीर ने मंगलवार को जनसुनवाई में पहुंचकर शिकायत की।

किसानों के अनुसार जिला कलेक्टर मंदसौर में दिये गये आवेदन पत्र में स्टेट बैंक आफ इंडिया शाखा भानपुरा द्वारा फसल बीमा में बैंक पोर्टल की तकनीकी त्रुटि के कारण हुए आर्थिक नुकसान की क्षतिपूर्ति हेतु आवेदन दिया गया, किसानों ने बताया कि उनके मालिकाना हक की कृषि भूमि पर एसबीआई भानपुरा से केसीसी ऋण बैंक से करवाने पर फसल बीमा की राशि बैंक द्वारा काट ली गई परंतु जब खरीफ फसल 2025 में किसानों को नुकसानी हुई।

इस पर बैंक ने किसानों को नुकसानी का भुगतान नहीं किया, उपरोक्त किसानों ने बताया कि लगभग 7 लाख रुपए उन्हें बीमा नुकसानी के मिलने थे एवं बैंक ने केसीसी खातों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का बीमा प्रीमियम काटने के बावजूद फसल नुकसानी का भुगतान नहीं करने पर संबंधित बैंक अधिकारी से लिखित में निवेदन किया गया परंतु दिए गए आवेदनों की पहुंच/प्राप्ती देने से भी ब्रांच मैनेजर द्वारा मना कर दिया गया एवं लंबे समय से अनेक बार बैंक शाखा भानपुरा में संपर्क करने के बावजूद जब उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिला।

यहां तक कि भारतीय स्टेट बैंक शाखा भानपुरा के शाखा प्रबंधक द्वारा शिकायत आवेदन लेने से साफ मना कर दिया गया एवं संबंधित अधिकारी से पूछने पर अधिकारी ने अत्यंत गैर जिम्मेदाराना जवाब दिया कि हमारी एजेंसी मुंबई है।

पीड़ित किसानों ने बताया कि ऐसे में क्या गरीब किसान शिकायत लेकर मुंबई जायेंगे। किसानों ने बताया कि लंबे समय से वे बैंक अधिकारी से संपर्क कर रहे हैं, परंतु संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर एवं उन्हें बीमा राशि प्राप्त नहीं होने पर जनसुनवाई तक आवेदन देने का कदम उठाना पड़ा।

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