
नईदुनिया प्रतिनिधि, मंदसौर। मंदसौर पुलिस द्वारा पकड़े गए साइबर ठगों के तार देश की सीमा को पार पाकिस्तान से जुड़ गए है। वहां कराची में बैठे दो मुख्य सरगना ठगी के सारे रुपयों को यूएसडीटी (एक तरह की क्रिप्टो करेंसी) में लेते थे और 70 प्रश खुद रखते थे और 30 प्रश बिहार के आरोपितों को देते थे।
ठगी के रुपयों को यूएसडीटी में बदलने का कार्य जयपुर में बैठा व्यक्ति करता हैं। अभी उसकी तलाश में पुलिस दल गया हुआ है। ठगी के तार पाकिस्तान के जुड़ने और ठगे गए रुपयों को यूएसडीटी में बदलने से मामला अंतरराष्ट्रीय हो गया है और जल्द ही इस मामले में एनआईए की इंट्री हो सकती है। वहीं पाकिस्तान में बैठे आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए इंटरपोल की मदद भी ली जा सकती है।
साइबर ठगी के आरोपितों की गिरफ्तारी के बाद चल रही पूछताछ में एक से बढ़कर एक खुलासे हो रहे हैं और छोटे गांवों में बैठकर अपराध करने वालों के तार विदेश तक पहुंच रहे हैं। इसके पश्चात ठगी की रकम को सीधे यूएसडीटी में बदला जा रहा है। इन लोगों का नेटवर्क देखकर पुलिस अधिकारी भी चौक गए है।
अभी तक म्यूल एकाउंट के अलावा पुलिस को सीडीएम के 133 खाते मिले हैं जिनमें ठगी की रकम नगद जमा करने वाली मशीन से ट्रांसफर की गई है। वहीं जयपुर का एक व्यक्ति चिन्हित हुआ है जो यह रुपये निकालकर उसे यूएसडीटी में बदल रहा था।
अब पुलिस जयपुर में आरोपित को पकड़ने गई हुई है। उसके आने के बाद आगे की लिंक भी पता चलेगी। पुलिस ने सीडीएम (कैश मशीन से रुपये जमा करने वाले) 133 खाते चिन्हित किए है। यह सभी अलग अलग कंपनी के नाम से हैं जिनमें कई शैल कंपनियां भी है। इन्हीं खातों से रुपये निकालकर यूएसटीडी खरीदी जाती और वह पाकिस्तान में बैठे मुख्य सरगना को भेजी जा रही थी। अभी तक की पूछताछ में आरोपितों ने बताया है कि ठगी की 70 प्रश राशि पाकिस्तानी रखते थे और 30 प्रश हमे देते थे।
बिहार में शराबबंदी है और नेपाल की सीमा से सटे गांवों व शहरों के बदमाश शराब पीने अकसर नेपाल पहुंच जाते थे वहीं अलग-अलग क्षेत्रों के बदमाशों से इनकी पहचान हुई जिनमें कुछ पाकिस्तानी भी थे। वहीं से यह धीरे-धीरे साइबर ठगी करने लगे।
बिहारी गिरोह के मास्टर माइंड टोनी ने पुलिस की पूछताछ में पाकिस्तान के कराची निवासी अब्दुल और रज्जाक के बारे में भी बताया है। यह दोनों बिहारी गेंग को संचालित करते हैं और ठगी का सारा रुपया यूएसडीटी के रूप में पाकिस्तान बुला लेते थे। टोनी सहित सभी छह आरोपित पाकिस्तान के कराची निवासी अब्दुल और रज्जाक के लंबे समय से संपर्क में थे।
पुलिस को जो 11 करोड़ से अधिक का हिसाब मिला है। इसका बड़ा हिस्सा कराची निवासी आरोपितों ने यूएसडीटी के माध्यम से अपने यहां मंगा लिया है। मंदसौर पुलिस लगभग 32 लाख रुपये फ्रीज करा चुकी है। इसके चलते यह ठग निकाल नहीं पाए है।
एसपी विनोद कुमार मीना ने बताया कि बिहारी गिरोह टोनी और शिवम पाकिस्तान के कराची निवासी अब्दुल और रज्जाक के संपर्क में थे। अप्रैल के बाद से यह लगातार वाट्स एप से संपर्क में हैं। अभी बारीकी से जांच की जा रही है। पाकिस्तान से लिंक जुड़ी होने से अब केंद्रीय जांच एजेंसियों को भी जानकारी भेजी जाएगी।
शामगढ़ थाना प्रभारी कपिल सौराष्ट्रीय ने बताया कि कड़े गए गिरोह के मास्टर माइंड टोनी पुत्र संजय राम की सात दिन की रिमांड मिली है उससे पूछताछ की जा रही है। वहीं बाकी आरोपित त्रिलोकी कुमार पुत्र नागेंद्र कुर्मी, शिवम पुत्र चंद्रशेखर गुप्ता, बबलू पुत्र मनीष प्रसाद कुशवाह, गुंजन पुत्र चंद्रेश्वर प्रसाद गुप्ता, शशि पुत्र शंभूप्रसाद कलवार को जेल भेज दिया गया है।