
नईदुनिया न्यूज, पिपलियामंडी (मंदसौर) : विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट ने दो वर्षीय बालिका के योन उत्पीड़न के मामले में आरोपित को 10 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
मामले की सुनवाई के दौरान पीड़िता के स्वजन ने आरोपित से राजीनामा कर लिया था। घटना के चश्मदीद गवाह भी न्यायालय में बयानों से मुकर गए थे। इसके बावजूद न्यायालय ने अपराध की गंभीरता और उपलब्ध साक्ष्यों को आधार बनाकर राजीनामा स्वीकार नहीं किया और आरोपित को सजा सुनाई।
अभियोजन के अनुसार वर्ष 2024 में पिपलियामंडी थाने में दो वर्षीय बालिका की माता ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि कमल पुत्र रामलाल खटीक निवासी अंजुमन गली, पिपलियामंडी ने बालिका का लेंगिक उत्पीड़न किया है। प्रकरण में तीन चश्मदीद गवाह भी थे।
पुलिस ने बालिका का मेडिकल परीक्षण कराकर आरोपित के विरुद्ध भादंसं की धारा 376, 363, 366, 342 तथा पाक्सो एक्ट की धारा 5(एम)/6 के तहत प्रकरण दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार किया था। न्यायालय में सुनवाई के दौरान बालिका के स्वजन ने आरोपित के साथ राजीनामा कर लिया।
अपने बयानों में उन्होंने आरोपित को मानसिक कमजोर बताते हुए उसके पागल होने की बात भी कही। घटना का चश्मदीद साक्षी होने का दावा करने वाले तीनों गवाह भी पलट गए और आरोपित के पक्ष में बयान दिए। न्यायाधीश ने अपराध की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए राजीनामे को स्वीकार करने से मना कर दिया।
न्यायाधीश ने आदेश में लिखा भी कि आरोपित कमल ने स्वयं राजीनामा दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए है सुनवाई के दौरान न्यायालय में पूछे गए प्रश्नों के उत्तर भी दिए। इन परिस्थितियों में उसे मानसिक रुप से अक्षम मानने का कोई आधार ही नहीं बनता। इसलिए स्वजन के राजीनामे और स्वतंत्र गवाहों के पक्षद्रोही होने के बावजूद पुलिसकर्मियों की गवाही तथा चिकित्सकीय साक्ष्य को पर्याप्त माना।
इन साक्ष्यों के आधार पर आरोपित कमल खटीक को दोष सिद्ध करार दिया गया। अभियोजन के अनुसार अपराध में अधिकतम मृत्युदंड तक का प्रावधान था लेकिन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने आरोपित को 10 वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित करने का आदेश दिया।