
नईदुनिया प्रतिनिधि, मंदसौर। गांधीसागर अभयारण्य में चीते तो आ गए हैं, पर उनकी वंश वृद्धि नहीं हो पा रही है। प्रभास और पावक को डेढ़ साल और मादा चीता धीरा को भी एक साल पूरा हो गया है, पर धीरा के मां नहीं बनने से वन विभाग के प्रयासों को झटका लग रहा है।
अभी 17 सितंबर को कूनो से मादा चीता निर्वा को लाने की योजना बनी थी, पर मुख्यमंत्री का दौरा निरस्त होने से निर्वा का आना भी टल गया है। अब वंश वृद्धि की उम्मीदों को फिर से झटका लगा है। अब फिर से सरकार के इशारे पर निगाहे टिकी है कि कब गांधीसागर में और चीते छोड़ने की योजना बनती है।
गांधीसागर अभयारण्य में एक साल में धीरा की पावक व प्रभास के साथ मेटिंग के सारे प्रयास नाकाम हो गए है। जबकि वन विभाग के अधिकारी कई बार तीनों को एक साथ बाड़े में छोड़ चुके हैं। पर धीरा ने कोई सकारात्मक रुख नहीं दिखाया। इसके बाद से ही कूनो से एक और मादा चीता के आने का इंतजार किया जा रहा है।
गांधीसागर में 20 अप्रैल 2025 को दो नर चीता प्रभास और पावक को छोड़ा गया था। वही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस पर 17 सितंबर 2025 को मादा चीता धीरा को छोड़ा गया था। अभी प्रभास व पावक एक बाड़े में व धीरा अलग बाड़े में हैं।
वन विभाग के अधिकारियों ने यहां चीतों की वंश वृद्धि की कोशिशें भी शुरू की थी। इसके लिए धीरा व प्रभास, पावक को एक बाड़े में भी रखा था। एक दो बार करीब भी आए तब वन अधिकारी खुश हुए थे कि गांधीसागर की धरती पर चीतों का जन्म हो सकेगा। पर धीरा ने मेटिंग के लिए रुचि नहीं दिखाई। कई प्रयास के बाद भी जब सफलता नहीं मिली।
वन विभाग के अधिकारियों को उम्मीद थी कि बोत्सवाना से कूनो लाए गए चीतों में से कुछ को गांधीसागर में छोड़ा जा सकता है। पर उस समय भी किसी को यहां छोड़ा नहीं गया। अभी प्रधानमंत्री के जन्मदिवस पर 17 सितंबर को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन व मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा मादा चीता निर्वा को गांधीसागर अभयारण्य में छोड़ने का कार्यक्रम बना था, पर कार्यक्रम निरस्त होते ही निर्वा के आने की उम्मीद टूट गई।
मंदसौर जिले के वन अधिकारी चाह रहे हैं कि अब कूनो से मादा चीता मिले जिससे गांधीसागर की धरती भी चीतों की जन्मस्थली बन सके। यह कवायद देश में चीतों की प्राकृतिक वृद्धि के लिए की जा रही है।
अभी गांधीसागर अभयारण्य में तीन अफ्रीकी चीते प्रभास, पावक व धीरा रह रहे हैं। प्रभास व पावक 15.5 वर्ग किमी के एक बाड़े में हैं। वहीं धीरा भी इससे सटे 15.5 वर्ग किमी के बाड़े में हैं। प्रभास व पावक को यहां एक साल पूरा हो गया है। इसके अलावा धीरा को भी आठ माह हो गए है।
चीता पुनर्वास प्रोजेक्ट के तहत चल रहे इस कार्यक्रम को लेकर अक्टूबर में दक्षिण अफ्रीका के पांच सदस्यीय दल ने गांधीसागर अभयारण्य का भी दौरा किया था। उन्होंने यहां चीता प्रोजेक्ट के तहत बनाए गए 64 वर्ग किमी क्षेत्र में बनाए गए बाड़ों को देखा। वहीं प्रभास, पावक व धीरा की गतिविधियों की देखा। उनके रख रखाव सहित अन्य सुविधाओं को भी देखा था। इसके बाद अफ्रीकन दल ने चीतों को लेकर किए जा रहे कार्यों की प्रशंसा भी की थी।
गांधीसागर में अभी प्रभास व पावक 15.5 वर्ग किमी के एक बाड़े में व धीरा 15 वर्ग किमी के बाड़े में रह रही है। वन विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि तीनों चीतों को गांधीसागर की धरा भा गई है। प्रभास व पावक लगभग 170 से अधिक जानवरों का शिकार भी कर चुके हैं। वहीं बाड़े में भी उनकी एक्टिविटी अच्छे से बनी हुई है।
धीरा की मेटिंग के लिए कई बार प्रयास किए गए हैं, पर सफलता नहीं मिली है। अब हम इंतजार कर रहे हैं कि कूनो से हमें मादा चीता मिले। चीतों के बसने से पर्यटकों का आकर्षण बढ़ेगा, जल थल और नभ के पर्यटन की अपार संभावना लिए आर्थिक उन्नति का माध्यम भी गांधीसागर बसेगा। -संजय रायखेरे, डीएफओ