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Dussehra Unique traditions: मंदसौर में रावण की जमाई राजा मानकर पूजा, धमनार में मुक्का मार होगा दंभ का अंत

मंदसौर जिले में दशहरे पर अनूठी परंपराएं हैं। शहर के खानपुरा में रावण को मंदोदरी का मायका होने से जमाई राजा मानकर पूजा जाता है और शाम को प्रतीकात्मक वध...और पढ़ें

By Alok SharmaEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Wed, 01 Oct 2025 07:00:06 PM (IST)Updated Date: Wed, 01 Oct 2025 07:53:01 PM (IST)
Dussehra Unique traditions: मंदसौर में रावण की जमाई राजा मानकर पूजा, धमनार में मुक्का मार होगा दंभ का अंत
खानपुरा में रावण प्रतिमा को नामदेव छीपा समाज रावण बाबा मानकर पूजा-अर्चना करते हैं।

HighLights

  1. मंदसौर में रावण को जमाई राजा मानकर पूजा।
  2. दशहरे पर जिले में अनूठी प्राचीन परंपराएं।
  3. धमनार में मुक्का मारकर रावण के दंभ का अंत।

नईदुनिया प्रतिनिधि, मंदसौर: मंदसौर जिले में दशहरे पर प्राचीनकाल से अनूठी परंपरा चली आ रही है। देश के अधिकांश भागों में रावण के पुतले का दहन किया जाता है। शहर के खानपुरा क्षेत्र में रावण को जमाई राजा का मान सम्मान देकर सुबह ढोल-ढमाके के साथ पूजा की जाएगी।

शाम को माफी मांगकर प्रतीकात्मक वध करेंगे। इधर जिले के ग्राम धमनार में भी रावण की प्रतिमा के सामने राम-रावण की सेना के बीच वाकयुद्ध होगा। दोनों तरफ से एक-दूसरे पर जलते हुए टोपले फेंके जाएंगे। राम की सेना में शामिल युवक रावण तक पहुंचकर नाक पर मुक्का मारकर दंभ का अंत करेंगे।


खानपुरा में 500 साल पुरानी रावण प्रतिमा

मंदसौर में घनी बस्ती वाले क्षेत्र खानपुरा में लगभग 500 साल पुरानी रावण प्रतिमा को नामदेव छीपा समाज रावण बाबा मानकर पूजा-अर्चना करते हैं। प्रचलित मान्यता है कि रावण की पत्नी मंदोदरी का पीहर मंदसौर में नामदेव समाज में ही था। इसके चलते खानपुरा क्षेत्र में रावण को जमाई राजा मानकर पूजते हैं। दशहरे पर सुबह नामदेव छीपा समाज के महिला-पुरुष खानपुरा स्थित श्री बड़ा लक्ष्मीनारायण मंदिर से ढोल के साथ रावण प्रतिमा स्थल पहुंचकर पूजा-अर्चना करेंगे। लोग रावण बाबा से पूरे क्षेत्र को बीमारी व महामारी से दूर रखने के लिए प्रार्थना करेंगे। पैर में लच्छा भी बांधेंगे। शाम को गोधूलि वेला में रावण प्रतिमा की पूजा-अर्चना कर माफी मांगकर गले में पटाखे की लड़ जलाकर प्रतीकात्मक वध करेंगे।

रावण की प्रतिमा के सामने घूंघट करती हैं महिलाएं

रावण को जमाई राजा मानने की मान्यता के कारण ही नामदेव समाज सहित कुछ अन्य समाज की बुजुर्ग महिलाएं आज भी रावण की प्रतिमा के सामने से गुजरते समय घूंघट निकालती है। इतिहासकार मंदोदरी के मंदसौर के रिश्ते के किसी भी तरह के साक्ष्य होने की बात से इनकार करते रहे हैं पर रावण की प्रतिमा मंदसौर में क्यों बनी इसके पीछे कोई उचित कारण नहीं बता पाते हैं। बुजुर्ग मंदोदरी से शहर के रिश्ते का सबसे बड़ा प्रमाण देते हुए उल्टा प्रश्न खड़ा करते हैं कि इस शहर का नाम मंदसौर क्यों हुआ? मंदोदरी के रिश्ते के कारण ही यहां का नाम मंदसौर है। हालांकि कही भी उल्लेख नहीं होने के कारण धार्मिक क्षेत्रों से जुड़े लोग व इतिहासकार इसे नहीं मानते हैं।

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