
नईदुनिया प्रतिनिधि, मंदसौर। प्रदेश में किसानों को ऊर्जा और सिंचाई की दोहरी सुरक्षा देने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री कुसुम-बी योजना (प्रधानमंत्री कृषक मित्र सूर्य योजना) के तहत प्रदेश के 52 हजार किसानों के खेतों में सोलर पंप लगाए जा रहे हैं। इसमें मंदसौर, नीमच और शाजापुर जैसे कृषि प्रधान जिले फोकस में हैं, जहां सोलर पंप से खेती की तस्वीर बदलने की तैयारी है। साथ ही, बैतूल, भिंड, सागर, जबलपुर, अशोकनगर, भोपाल एवं सीहोर जिलों में सोलर पंप लगाने का काम शुरू हो चुका है। अब तक 34,600 सोलर पंप इकाइयों को लेटर ऑफ अवार्ड और 33 हजार किसानों को कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं।
सोलर पंप लगने के बाद किसानों को सिंचाई के लिए बिजली बिल नहीं देना होगा। इससे उनकी लागत घटेगी और बचत बढ़ेगी। इतना ही नहीं, जरूरत से ज्यादा उत्पादित सौर ऊर्जा को सरकार को बेचकर किसान अतिरिक्त आय भी कमा सकेंगे। इससे किसानों को सिंचाई के लिए स्थायी और भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत मिलेगा, साथ ही बिजली कटौती और अनियमित आपूर्ति से मुक्ति मिलेगी। खेती की लागत में कमी आने से उत्पादन और आय में वृद्धि होगी और किसान ऊर्जा दाता बन सकेंगे।
योजना के तहत किसान को सोलर पंप का लाभ इस शर्त पर दिया जाएगा कि जिस खसरा या बटांकित खसरे की कृषि भूमि पर सोलर पंप लगाया जाएगा, वहां भविष्य में विद्युत पंप लगाए जाने की स्थिति में बिजली आपूर्ति पर कोई अनुदान नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही किसान को स्वप्रमाणीकरण देना होगा कि संबंधित खसरा या उक्त भूमि पर वर्तमान में कोई विद्युत पंप संचालित या संयोजित नहीं है।
योजना के अंतर्गत एक एचपी (HP) से 7.5 एचपी तक के सोलर पंप पर 90% तक अनुदान का प्रावधान है। इसमें 30 प्रतिशत अनुदान केंद्र सरकार से मिलेगा, जबकि किसान का अंशदान लगभग 10 प्रतिशत होगा। शेष 60 प्रतिशत राशि ऋण के रूप में होगी, जिसका ब्याज सहित भुगतान राज्य सरकार करेगी। अन्य प्रमुख बातों में सोलर पंपों का पांच साल तक रखरखाव संबंधित एजेंसी करेगी और यूएसपीसी (USPC) युक्त तथा सामान्य सोलर पंप, दोनों पर समान अनुदान देय होगा।
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